केकड़ी: 42 डिग्री तापमान में पैदल चलने को मजबूर श्रमिक, कहा- 'अब तो आंसू भी सूख गए'

यह मजदूर 42 डिग्री तापमान में पैदल ही अपने घरों की ओर आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन मजदूरों की कोई नहीं सुनने वाला.

केकड़ी: 42 डिग्री तापमान में पैदल चलने को मजबूर श्रमिक, कहा- 'अब तो आंसू भी सूख गए'
यह श्रमिक कोसों दूर का सफर पैदल ही तय कर रहे है.

मानवीर सिंह/केकड़ी: कोरोना वायरस (Coronavirus) की वजह से लॉकडाउन (Lockdown) लागू किया गया है. ऐसे में, मजदूरों के सामने अपने घर जाने की समस्या उत्पन्न हो गई है. लेकिन साधन नहीं है. ऐसे में यह श्रमिक कोसों दूर का सफर पैदल ही तय कर रहे है.

एक ऐसा ही मामला प्रदेश के अजमेर जिले के केकड़ी में सामने आया है. यहां पर तपती गर्मी में, पांव में छाले पड गए, सिर पर भारी-भरकम वजन, गोद में बच्चे को उठाए हुए और सफर कई किलोमीटर का तय करके लोग अपनी मंजिल की ओर पहुंच रहे है.

42 डिग्री के तापमान में पैदल ही सफर
लॉकडाउन की वजह से मजदूर वर्ग की यही हालत नजर आ रही है. जहां एक ओर कोटा में पढ़ने वाले छात्रों को सरकार घर भेजने की पूरी व्यवस्था कर रही है, वहीं, यह मजदूर 42 डिग्री तापमान में पैदल ही अपने घरों की ओर आगे बढ़ रहे हैं. लेकिन मजदूरों की कोई नहीं सुनने वाला.

पांव में पड़े छाले
सोमवार को एक ऐसा ही नजारा केकड़ी में नजर आया. यहां पर करीब सौ से भी अधिक लोग गुजरात से मध्य प्रदेश जाने के लिए रवाना हुए और एक महीने से पैदल चलकर 750 किमी लंबा सफर तय करके केकड़ी पहुंचे. इसी तरह 39 से अधिक श्रमिक जोधपुर जिले से पैदल चलकर केकड़ी पहुंचे. अब तक इन्होंने 464 किमी का सफर तय कर लिया है और 350 किमी का सफर अब तय करके मध्य प्रदेश के गुना जाना है. लेकिन अब इनकी हालत खराब होती जा रही है. इनके पांव में छाले पड़ चुके हैं और गर्मी से हाल बेहाल है. इन परिवार का कहना कि हम सभी लोग मजदूरी करने गए थे.

पांव में इतना दर्द
लॉकडाउन की वजह से पिछले एक महिने से वाहन बंद है. ऐसे में, वह पैदल ही अपने घर की ओर बढ़ रहे हैं. इन लोगों ने बताया कि, इन्हें भूखा-प्यासा तो नहीं रहना पड़ता, क्योंकि कुछ लोग इन्हें खाना-पानी, चाय की अच्छी व्यवस्था करवा देते हैं. लेकिन पांव में दर्द इतना है कि, अब चला नहीं जाता. लेकिन घर पर बैठे परिजनों की याद इनके कदम रूकने नहीं देती है.

मजबूरी के आगे सूख जाते हैं आंखों के आंसू
इन लोगों ने कहा कि, पुलिस जहां भी मिलती है, उन्हें खाने-पीने का पूछती है ओर वहीं रुकने का बोलती है. लेकिन बच्चों और परिवार से मिलने की गुहार लगाकर वह, वहां से निकल पड़ते हैं. इन्होंने बताया कि, पिछले 30 दिन से वह लगातार चल रहे हैं. पहले तो आंखों में आंसू आ जाते थे, लेकिन अब आंसू भी सूख चुके हैं.