झालावाड़: मीलों पैदल सफर कर घर लौट रहे श्रमिक, बोले- थकावट से ज्यादा जरूरी वापसी

सिर पर थैला रखे पैदल जा रहे लोग जोधपुर से सीमावर्ती मध्यप्रदेश के खिलचीपुर की ओर अपने गांव जा रहे हैं.

झालावाड़: मीलों पैदल सफर कर घर लौट रहे श्रमिक, बोले- थकावट से ज्यादा जरूरी वापसी
प्रतीकात्मक तस्वीर.

महेश परिहार, झालावाड़: जिले से इन दिनों दर्जनों पैदल यात्री अपने घरों की ओर जाते नजर आ रहे हैं. इन्हें पुलिस के जवानों द्वारा भोजन के पैकेट भी वितरित किए जा रहे तो स्वास्थ्य टीमें भी उनकी स्क्रीनिंग कर आगे भेज रही हैं.

कोरोना महामारी से बचाव के लिए पूरा देश एकजुट हो शटडाउन के नियमों का पालन कर रहा है लेकिन इन सबके बीच सबसे ज्यादा दुखदाई पल वह लोग झेल रहे हैं, जो अपने परिवार के पालन-पोषण के लिए घरों से मीलों दूर मजदूरी का कार्य कर रहे थे. ऐसे में इन दिहाड़ी मजदूरों को अब न तो रोजगार मिल पा रहा, न ही खाने के लिए अन्न का दाना.

हालात यह हैं कि चाह कर भी ये लोग अपने घर नहीं लौट पा रहे क्योंकि वाहनों का आवागमन भी पूरी तरह बंद है. ऐसे में अब इन श्रमिकों ने पैदल ही मीलों का सफर तय कर अपने घर पहुंचने का लक्ष्य बना लिया है. जुनून ऐसा की दूरी कितनी ही हो, लेकिन बस पहुंचना है तो अपने घर.

सिर पर थैला रखे पैदल जा रहे लोग जोधपुर से सीमावर्ती मध्यप्रदेश के खिलचीपुर की ओर अपने गांव जा रहे हैं. परिवहन व्यवस्था के बंद होने के कारण जोधपुर से ये सभी पैदल ही अपने घरों की ओर निकले थे. रास्ते मे पुलिस के जवानों और समाजसेवियों ने कहीं भोजन के पैकेट दिए तो कहीं कुछ सफर वाहनों से पूरा करवाया. जहां जैसी मदद मिली, बस आगे बढ़ते चले गए.

ये मजबूर श्रमिक जब झालावाड़ से पैदल गुजरे, तो इनके चेहरे पर शिकन नहीं बल्कि घर पहुंचने का जुनून नजर आया हालांकि स्वास्थ्य विभाग की टीमें भी लगातार हर जगह इन लोगों की स्क्रीनिंग करने के बाद ही आगे भेज रही हैं. बहरहाल परेशानी तो है लेकिन एक ही जगह नहीं रुक पाना, इनकी लोगों की मजबूरी भी.