जयपुर: नजरिये में बदलाव लाने के लिए 'साइंस जर्नलिज्म' की वर्कशॉप का आयोजन

किसी भी बात को तर्क की कसौटी पर परखना ही विज्ञान का आधार है और इसी नज़रिये को देखते हुए अब पत्रकारिता में वैज्ञानिक नज़रिये को बढ़ावा देने की पैरवी की जाने लगी है. 

जयपुर: नजरिये में बदलाव लाने के लिए 'साइंस जर्नलिज्म' की वर्कशॉप का आयोजन
पत्रकारिता में वैज्ञानिकता को बढ़ावा देने के लिए अब राजस्थान में विज्ञान और प्रोद्यौगिकी विभाग भी आगे आया है.

जयपुर: मीडिया में अब विज्ञान पत्रकारिता को बढ़ावा देने की पैरवी की जाने लगी है. इसके पैरोकारों में विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग भी शामिल हो गया है. गुरूवार को विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग और जनसंपर्क विभाग के संयुक्त तत्वावधान में साइंस जर्नलिज्म को लेकर एक वर्कशॉप हुई. 

पत्रकार जगत के प्रतिनिधियों के साथ ही इसमें जनसंपर्क कर्मी और पत्रकारिता के स्टूडेंट्स भी शामिल हुए. इस दौरान विज्ञान प्रसार से जुड़े लोगों ने खबरों में वैज्ञानिकता का पुट शामिल करने पर ज़ोर दिया. 

किसी भी बात को तर्क की कसौटी पर परखना ही विज्ञान का आधार है और इसी नज़रिये को देखते हुए अब पत्रकारिता में वैज्ञानिक नज़रिये को बढ़ावा देने की पैरवी की जाने लगी है. पत्रकारिता में वैज्ञानिकता को बढ़ावा देने के लिए अब राजस्थान में विज्ञान और प्रोद्यौगिकी विभाग भी आगे आया है.

अंधविश्वास से भी बच सकेंगे लोग
जनसंपर्क विभाग और विज्ञान प्रौद्योगिकी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में हुए कार्यक्रम में मीडिया जगत के लोगों और जनसंपर्क कर्मियों का संवाद वैज्ञानिक दृष्टिकोण की पैरवी करने वालों से हुआ. इस कार्यक्रम की शुरूआत करते हुए हरिदेव जोशी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति ओम थानवी ने कहा कि अगर वैज्ञानिकता को समाचारों में बढ़ावा दिया जाएगा तो उससे लोगों के सोचने का नज़रिया भी बदलेगा और इस आधार पर लोग अंधविश्वास से भी बच सकेंगे. 

साइंस मीडिया से लोगों की तर्क क्षमता भी बढ़ती है
जनसंपर्क आयुक्त नीरज के पवन ने भी इस वर्कशॉप के लिए विभाग के जनसंपर्क अधिकारियों के साथ ही अतिरिक्त आयुक्त स्तर तक के अधिकारियों को भी प्रोत्साहित किया. दो दिन की इस कार्यशाला पर आयुक्त ने विभाग के अधिकारियों से रोज़ाना उनके सुझाव और अनुभव भी देने को कहा. डीपीआर कमिश्नर ने कहा कि पत्रकारिता में वैज्ञानिक नज़रिया और विज्ञान से जुड़े मामलों को मीडिया में जगह देना दोनों अलग पहलू हैं. उन्होंने कहा कि इससे लोगों की तर्क क्षमता भी बढ़ती है.

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की सचिव मुग्धा सिन्हा ने बताया कि उनके विभाग को 46 साल हो गए हैं और 50 साल पूरे करने की तरफ़ विभाग बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि विज्ञान की शोध रुचिपूर्ण तरीके से जनता तक पहुंचे और उससे समाज को फायदा हो सके, इसकी कोशिश में ही यह कार्यक्रम आयोजित किया गया है.

कई समस्याओं पर की गई बात
इस दौरान पराली की समस्या से होने वाले प्रदूषण, पानी की शुद्धता, सांभर में पक्षियों के मारे जाने जैसे कई पहलुओं पर वैज्ञानिक नज़रिये से बात हुई. इस दौरान दिल्ली से आए साइंटिस्ट बीके त्यागी ने कहा कि खबरों में भी वैज्ञानिकता होगी तो उन्हें तार्किक आधार पर परखा जा सकेगा. इससे समाचारों की विश्वसनीयता भी बढ़ेगी. इसके साथ ही विज्ञान जगत से जुड़ी खबरों को भी मीडिया में जगह देने की पैरवी की गई. कार्यक्रम में राजधानी में मीडिया स्टडीज़ से जुड़े 12 संस्थानों के स्टूडेंट्स भी शामिल हुए.