कलयुग में इस तरह करें भगवान भोलेनाथ की पूजा, बरसेगी महादेव की कृपा

 श्रावण के पहले दिन शिवभक्तों की शिव मंदिरों में भीड़ उमड़ पड़ी.

कलयुग में इस तरह करें भगवान भोलेनाथ की पूजा, बरसेगी महादेव की कृपा
श्रावण के पहले दिन शिवभक्तों की शिव मंदिरों में भीड़ उमड़ पड़ी.

अखिलेश शर्मा, डूंगरपुर: यूं तो मेवाड़ी परंपरा के अनुसार राजस्थान में श्रावण मास 15 दिन पहले शुरू हो गए थे, पर गुजरात से सटे वागड़ में गुजराती पंचांग के अनुसार तीज-त्यौहारों को निभाने की परंपराओं के अनुरूप डूंगरपुर में श्रावण मास आज हरियाली अमावस्या से शुरू हुआ है. 

श्रावण मास की शुरुआत के साथ ही डूंगरपुर शहर सहित जिले भर के शिवालयों में धार्मिक अनुष्ठानों का दौर भी शुरू हो चुका है. श्रावण के पहले दिन शिवभक्तों की शिव मंदिरों में भीड़ उमड़ पड़ी. 

इस मौके पर शहर के हजारेश्वर, नया महादेव मंदिर, धनेश्वर शिवालय, सोमनाथ महादेव, जागेश्वर महादेव, सारणेश्वर, सिद्देश्वर, घाटी स्थित महाकालेश्वर मंदिर सहित विभिन्न शिव मंदिरों में शिव भक्तों ने भगवान शिव का दुग्ध और जलाभिषेक करते हुए बिल्व पत्र चढ़ाते हुए भगवान शिव की पूजा-अर्चना की. 

यह भी पढ़ें- राजस्थान: लॉकडाउन के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में 1 जुलाई से फिर से खुलेंगे छोटे मंदिर

इस दौरान शिवालय हर-हर महादेव और बम बम भोले के जयकारों से गूंज उठा. इधर शहर के कई मंदिर में शिव भक्त पार्थिवेश्वर शिवलिंग बनाने में जुटे हैं. पुजारी संजय शास्त्री ने बताया कि कलयुग में पार्थिवेश्वर शिवलिंग की पूजा-अर्चना को श्रेष्ठ बताया गया है, जिसके तहत गंगेश्वर महादेव मंदिर में श्रावण मास के तहत मंदिर में पूरे श्रावण मास में सवा लाख मिट्टी के पार्थिवेश्वर शिवलिंग बनाकर उसे गेपसागर में विसर्जित किया जाएगा. 

उन्होंने बताया कि इसके तहत प्रतिदिन शिव भक्तों द्वारा मिट्टी के सवा 4 हजार पार्थिवेश्वर शिवलिंग बनाकर विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के साथ उनकी पूजा-अर्चना की जाएगी, फिर उसके बाद शिव भक्तों द्वारा गेप सागर में उन शिवलिंगों का विसर्जन किया जाएगा.