जयपुर नगर निगम ग्रेटर-हैरिटेज की तस्वीर साफ, ऊर्जावान के साथ बनेगा अनुभवी बोर्ड

ग्रेटर में शहर की सरकार की अगुवाई भी उच्च शिक्षित महिला ही करेगी. क्योंकि यहां एक डॉक्टरेट उपाधी धारक हैं तो दूसरी ऑक्सफोर्ड से बिजनेस डिप्लॉमा किया हुआ हैं.  

जयपुर नगर निगम ग्रेटर-हैरिटेज की तस्वीर साफ, ऊर्जावान के साथ बनेगा अनुभवी बोर्ड
नगर निगम में इस बार शिक्षित और युवा पार्षद भी चुनकर पहुंचे हैं. (फाइल फोटो)

दीपक गोयल/जयपुर: जयपुर नगर निगम ग्रेटर और हैरिटेज में बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों ने युवाओं पर दांव खेला है और परिणामों के बाद सामने आया की इस बार इस बार दोनों नगर निगमों में पढ़े-लिखे युवाओं के साथ तजुर्बेकारों को शहरवासियों ने चुनकर भेजा हैं. इतना ही नहीं बीएडधारी, पीएचईडी धारक, वकील, खेती और व्यापार करने वाले भी इस बार शहरी सरकार के सदन में जनता की आवाज उठाते हुए नजर आएंगे.

महिलाओं के हाथ में होगी शहरी सरकार
ग्रेटर में शहर की सरकार की अगुवाई भी उच्च शिक्षित महिला ही करेगी. क्योंकि यहां एक डॉक्टरेट उपाधी धारक हैं तो दूसरी ऑक्सफोर्ड से बिजनेस डिप्लॉमा किया हुआ हैं. दरअसल, राजस्थान की राजधानी जयपुर में पहली बार बने दो नगर निगमों में की कमान इस बार युवा के साथ पढ़े-लिखों के पास रहेगी. क्योंकि हाल ही में हुए चुनाव में जो पार्षद जीतकर आए हैं उसमें से 45 फीसदी पार्षद ऐसे हैं, जो स्नातक या पोस्ट ग्रेजुएट हैं. यही नहीं इनमें अधिकांश 25 से 50 साल की आयु के है.

114 पार्षदों ने UG-PG तक की शिक्षा ली है
नगर निगम ग्रेटर और हैरिटेज दोनों के कुल जीतकर आए 250 पार्षदों में से 114 पार्षद ऐसे है जो स्नातक या पोस्ट ग्रेजुएट हैं. इसमें कुछ एमबीए, एमसीए और कानून के डिग्रीधारी भी हैं. इस बार किसान और मजदूरी का काम करने वाले लोगों को भी पार्षद बनने का मौका मिला है. हालांकि, कुछ प्रत्याशी ऐसे भी हैं, जो सिर्फ या तो साक्षर है या फिर नॉन मैट्रिक स्तर की शिक्षा ही ले पाए हैं. लेकिन ज्यादातर संख्या उन्हीं लोगों की है, जो 12वीं से लेकर ग्रेजुएट या फिर कोई डिप्लोमा धारक है.

इंजीनियर-वकील भी बनें पार्षद
इतना ही नहीं कुछ ऐसे भी हैं जो इंजीनियरिंग की डिग्री या डिप्लोमा हैं या फिर उन्होंने वकालत की पढ़ाई कर रखी है. इनमें से कुछ वकालत करते हैं, जबकि कुछ नहीं करते. कई ऐसे हैं जो लंबा राजनीतिक अनुभव रखते हैं.

शिक्षा के मामले में ये है स्थिति:-

शिक्षा का स्तर                      ग्रेटर                            हैरिटेज
12वीं                                    14                               16
स्नातक                                  45                               25
स्नातकोत्तर                             29                               15

इनके अलावा दोनों ही नगर निगमों में 90 ऐसे पार्षद है जो 10वीं तक या उससे कम पढे-लिखे हैं,

महिला पार्षदों का आंकड़ा
ग्रेटर में महिला पार्षदों की संख्या                 53 (35.33 प्रतिशत)
हैरिटेज में महिला पार्षदों की संख्या              37 (37 प्रतिशत)

73 पार्षद की उम्र 21-35 वर्ष के बीच
वहीं, राजनीति में अक्सर चर्चा रहती है कि 50 साल तक का व्यक्ति राजनीतिक नजरिए से यूथ होता है. जयपुर नगर निगम की बात करें तो यहां दोनों ही निगमों में 250 पार्षदों में से 73 ऐसे है जो 21 से 35 की उम्र के है. वहीं 36 से 50 साल तक की उम्र के 124 पार्षद. शेष 53 पार्षद 51 साल या उससे ज्यादा आयु के हैं. वहीं, इस बार निगम में 90 (37%) महिला पार्षद हैं. अब घर का चूल्हा-चौका के साथ दोनों नगर निगमों के 250 वार्डों में से 90 वार्डों की जिम्मेदारी भी संभालने के लिए 37 प्रतिशत महिला पार्षद तैयार हैं.

महिला पार्षदों के भी मिला मौका
इन महिला पार्षदों का कहना है कि वार्ड वासियों ने सेवा करने का उन्हें जो मौका दिया है वे उस मौके को भुनाते हुए वार्ड वासियों की हर उम्मीदों पर खरा उतरेंगी. उनका लक्ष्य रहेगा कि वार्ड में ज्यादा से ज्यादा विकास कार्य करवाए जाएं. गौरतलब है की पार्षदों को मानदेय और भत्ते के रूप में जो राशि मिलती है वो न्यूनतम मजदूरी से भी कम 3750 रुपए प्रतिमाह यानि 125 रुपए प्रतिदिन मिलता है. वहीं, महापौर को 20 हजार रुपए प्रतिमाह मिलता है. उपमहापौर को तो वो भी नहीं मिलता. उपमहापौर को मानदेय के बदले वाहन सुविधा और स्टाफ मिलता है.

इतना कम मानदेय होने के बाद भी पार्षद पद के लिए इतना आकर्षण होने के पीछे जो कारण वो है, इस पद का मान सम्मान, गरिमा और विकास की मजबूत कड़ी. जिस प्रकार से महापौर को शहर का प्रथम नागरिक का दर्जा होता हैं. उसी तरफ पार्षद वार्ड का प्रथम नागरिक होता है. राजनीतिक कैरियर में जनप्रतिनिधि बनने की यह पहली सीढ़ी होती है. पार्षद के पास सफाई, रोड लाइट, गार्डन, सड़क की जिम्मेदारी होती है. सामाजिक सुरक्षा पेंशन वार्ड पार्षद की अनुशंसा पर मिलती है. नगर निगम के सदस्य के रूप में पूरे शहर के विकास और सामाजिक कार्यों की जिम्मेदारी होती हैं.

बहरहाल, इस बार निगम चुनाव में कांग्रेस और बीजेपी ने उम्मीदवारों के चयन में शैक्षणिक योग्यता पर भी अच्छा-खासा ध्यान दिया है. लेकिन इन पार्षदों की पढ़ाई-लिखाई और तजुर्बा कितना शहर के विकास में काम आएगा ये तो आने वाला समय ही तय करेगा.