राजस्थान: युवाओं ने उठाया बेजुबान जानवरों की मदद का बीड़ा, शहर में कर रहे कुछ ऐसा...

ऐसे संकट के समय में जब आम आदमी अपनी जरूरत का सारा सामान लेकर घर में कैद है, तब सड़कों पर घूम रही भूखी प्यासी गायों का पेट भरने के लिए गौ पुत्र सेना आगे आई है.

राजस्थान: युवाओं ने उठाया बेजुबान जानवरों की मदद का बीड़ा, शहर में कर रहे कुछ ऐसा...
यह टीम भूखी प्यासी गायों को हरा चारा डाल कर उनकी जान बचाने में जुटी हुई है.

महेश परिहार/झालावाड़ा: कोरोना वायरस (Coronavirus) संक्रमण से बचाव को लेकर देश व प्रदेश मे आगामी 14 अप्रैल तक लॉकडाउन है. ऐसे में आम आदमी घरों में कैद होकर रह गया है. गरीब व जरूरतमंदो को सरकार व सामाजिक संस्थाएं भोजन और राशन सामग्री उपलब्ध करवा रही हैं, लेकिन सड़कों पर के बीच कई भूखे-प्यासे, बेजुबान जानवरों को आहार व चारा देने का बीड़ा उठाया है झालावाड़ शहर के कुछ युवाओं की एक टीम ने. यह टीम अपनी संस्था गौ पुत्र सेना के बैनर तले पूरे शहर में घूम घूमकर भूखी प्यासी गायों को हरा चारा डाल कर उनकी जान बचाने में जुटी हुई है.

दरअसल, झालावाड़ शहर की सामाजिक संस्था गो पुत्र सेना के बैनर तले शहर के कुछ युवा पिछले कई सालों से पशुधन व गायों की देखभाल व उन्हें चारा पानी देने मे जुटे हुए हैं. ऐसे में जब अब कोरोना वायरस संक्रमण के चलते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे देश में 21 दिनों का लॉकडाउन घोषित किया है.

ऐसे संकट के समय में जब आम आदमी अपनी जरूरत का सारा सामान लेकर घर में कैद है, तब सड़कों पर घूम रही भूखी प्यासी गायों का पेट भरने के लिए गौ पुत्र सेना आगे आई है. झालावाड़ शहर के कुछ समाजसेवी युवाओं की यह टीम पिछले कई सालों से गायों की सेवा के कार्य में जुटी हुई है.

इस दौरान इन युवाओं की टीम शहर में किसी भी स्थान पर दुर्घटनाग्रस्त गायों को पशु चिकित्सालय भी अपनी गाड़ी में ले जाती है, तो वे खुद भी लग कर उनका प्राथमिक उपचार करते हैं. अब कोरोना वायरस संक्रमण के संकट के काल में यह 'संकट के सूरमा' फिर सड़क पर उतरे हैं व अपनी गाड़ी में हरा चारा भरकर शहर के हर चौराहों पर जाकर अपने हाथों से गायों को हरा चारा देकर उनका पेट भर रहे हैं.

वहीं, गौ पुत्र सेना के झालावाड़ अध्यक्ष विनीत पोरवाल का कहना है कि झालावाड़ के पीपा पीठाधीश्वर संत झंकारेश्वर दास त्यागी महाराज की प्रेरणा से वह लोग इस कार्य में जुटे हुए हैं व आगे भी लगातार इसी तरह से इन बेजुबान जानवरों का पेट भरने के लिए काम करते रहेंगे.