रामविलास और चिराग पासवान ने पत्र लिखकर जस्टिस एके गोयल को एनजीटी अध्‍यक्ष पद से हटाने की मांग की

सुप्रीम कोर्ट से रिटायर होने के बाद जस्टिस एके गोयल को एनजीटी का अध्‍यक्ष बनाया गया. दलित समूह कर रहे हैं विरोध.

रामविलास और चिराग पासवान ने पत्र लिखकर जस्टिस एके गोयल को एनजीटी अध्‍यक्ष पद से हटाने की मांग की
फाइल फोटो

नई दिल्‍ली : जस्टिस एके गोयल को राष्‍ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) का अध्‍यक्ष बनाए जान से नाराज केंद्रीय मंत्री और लोजपा प्रमुख रामविलास पासवान ने गृह मंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखकर जस्टिस गोयल को पद से हटाने की मांग की है. उन्‍होंने पत्र में लिखा है कि दलित समूहों के संगठन ऑल इंडिया अंबेडकर महासभा (एआईएएम) भी जस्टिस गोयल को एनजीटी के अध्‍यक्ष पद से हटाने की मांग कर रहा है.

लोजपा अध्‍यक्ष रामविलास पासवान के मुताबिक एआईएएम ने सरकार से यह मांग की है कि वह संसद के मौजूदा सत्र में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निरोधक) अधिनियम को लाए. साथ ही अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और पिछड़ी जातियों से जुड़े मामलों में सरकार को त्‍वरित निर्णय लेने भी होंगे.

 

रामविलास पासवान के बेटे चिराग पासवान ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी पत्र लिखा है. इसमें उन्‍होंने कहा है कि 9 अगस्‍त को होने वाला दलित समूहों का प्रदर्शन पहले (अप्रैल) के मुकाबले अधिक आक्रामक होगा. उन्‍होंने अपने पत्र में पीएम मोदी से मांग की है कि जस्टिस गोयल को एनजीटी के अध्‍यक्ष पद से हटाया जाए. उन्‍होंने कहा है कि जस्टिस गोयल  ही वह जज थे जिन्‍होंने एससी/एसटी एक्‍ट के खिलाफ फैसला सुनाया था. चिराग पासवान का कहना है कि जस्टिस गोयल की बतौर एनजीटी प्रमुख पद पर हुई नियुक्ति से यह संदेश जा रहा है कि जैसे उन्‍हें इसका तोहफा दिया गया है.

बता दें कि 20 मार्च को सुप्रीम कोर्ट की एके गोयल और यूयू ललित की बेंच ने अहम फैसला दिया था. इसमें पीठ ने फैसला दिया था कि एससी-एसटी एक्‍ट के तहत कथित उत्पीड़न की शिकायत को लेकर तुरंत गिरफ्तारी नहीं होगी. सुप्रीम कोर्ट का कहना था कि प्रारंभिक जांच के बाद ही कार्रवाई की जाएगी. इस फैसले से नाराज लोगों ने देश भर में भारी विरोध प्रदर्शन किया था और दो अप्रैल को भारत बंद का आह्वान किया गया था. इस दौरान हुई हिंसा में 11 लोगों की मौत हो गई थी.