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सोमनाथ चटर्जी का आखिरी बयान, जाते-जाते भी देशवासियों को दे गए लोकतंत्र की सीख

तबीयत बिगड़ने से ठीक कुछ दिन पहले सोमनाथ चटर्जी ने न्यूज एजेंसी ANI को दिए अपने आखिरी बयान में भी देशवासियों को लोकतंत्र की सीख दी थी. 

सोमनाथ चटर्जी का आखिरी बयान, जाते-जाते भी देशवासियों को दे गए लोकतंत्र की सीख
सोमनाथ चटर्जी जीवन भर लोकतंत्र की सीख देते रहे.

कोलकाता: लोकसभा के पूर्व स्पीकर सोमनाथ चटर्जी के निधन से पूरा देश स्तब्ध है. सोमनाथ 10 सांसद बार रहे. वे हमेशा लोकतंत्र के हिमायती रहे और स्पीकर के तौर पर जब कभी मौका मिला उन्होंने सांसदों को लोकतंत्र की नसीहत दी. तबीयत बिगड़ने से ठीक कुछ दिन पहले सोमनाथ चटर्जी ने न्यूज एजेंसी ANI को दिए अपने आखिरी बयान में भी देशवासियों को लोकतंत्र की सीख दी थी. उन्होंने अपने आखिरी बयान में पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव में हुई गड़बड़ी पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कहा था कि यह लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है.

पश्चिम बंगाल में लोगों के मतदान के अधिकार और पंचायत चुनाव लड़ने से 'रोके' जाने पर 'गंभीर चिंता' व्यक्त करते हुए लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने कहा था कि राज्य में कोई लोकतंत्र नहीं रह गया है और राज्य उस स्थिति की तरफ बढ़ रहा है, जहां संविधान के अनुच्छेद 356 को लागू करने की मांग की जा सकती है. चटर्जी ने कहा, "यह अवश्विसनीय है. यहां तक कि लोगों को उनके न्यूनतम अधिकारों से भी जबरन वंचित किया जा रहा है. यहां लोकतंत्र नाममात्र भी नहीं बचा है. यह न केवल खेदजनक है, बल्कि गहरी चिंता का विषय है."

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सोमनाथ चटर्जी का जीवन परिचय-:
- सोमनाथ चटर्जी का जन्म 25 जुलाई 1929 को हुआ था. उनके पिता बंगाली ब्राह्मण एनसी चटर्जी और वीणापाणि देवी थे. उन्होंने अपनी पढ़ाई कलकत्ता (कोलकाता) और ब्रिटेन में की. इसके अलावा उन्होंने कोलकाता के प्रेसिडेंसी कॉलेज में भी पढ़ाई की.

-सोमनाथ चटर्जी ने ब्रिटेन में लॉ की पढ़ाई करने के बाद कलकत्ता हाइकोर्ट में प्रैक्टिस की और उसके बाद राजनीति में अपना कदम रखा.उन्होंने अपनी राजनीतिक करियर बतौर अधिकवक्त शुरूआत की.

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- वे साल 1968 में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य बन गए. यहां से उनके राजनीतिक करियर की असली शुरुआत हुई. इसके बाद चटर्जी ने पहली बार 1971 में लोकसभा चुनाव जीते. साल 2004 में 14वीं लोकसभा में वे दसवीं बार निर्वाचित किए गए.

- 4 जून 2004 को जब वे 14वीं लोकसभा के अध्यक्ष के रुप में चुने गए तो उनके नाम पर प्रस्ताव कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने रखा, जो सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया और श्री सोमनाथ चटर्जी निर्विरोध अध्यक्ष निर्वाचित कर लिए गए.

- साल 2008 में मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी (माकपा) ने सोमनाथ चटर्जी को पार्टी से निकाल दिया था.