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पार्टी चुनाव क्या हारी आप तो 'बेवफा' हो गए... ममता बनर्जी की TMC में बगावत! सत्ता जाते ही सिर फुटव्वल

TMC Crisis: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की भयावाह हार के बाद पार्टी के भीतर से ही शीर्ष नेतृत्व पर सवाल उठने लगे हैं. हालांकि पार्टी को शायद पता था कि अगर चुनावों में हार मिली तो किस पर ठीकरा फोड़ना है. इसलिए टीएमसी ने पहले ही कुछ पुराने प्रवक्ताओं को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाते हुए 6 साल के सस्पेंड कर दिया. 

TMC Crisis Mamata Banerjee Abhishek Banerjee (AI Image)
TMC Crisis Mamata Banerjee Abhishek Banerjee (AI Image)

Rebellion in TMC: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की करारी हार के बाद सिर-फुटव्वल का दौर तेज हो गया. 4 मई को नतीजे आने के बाद पहले तीन दिन तो मातम मनाए जाने जैसा सन्नाटा छाया रहा. चौथे दिन हार का ठीकरा फोड़ने के लिए कुछ बलि के बकरों की तलाश हुई. पांचवें दिन कुछ प्रवक्ताओं और नेताओं को टीएमसी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया. हालांकि हार वाले दिन से ही टीएमसी के भीतर शीर्ष नेतृत्व पर सवाल उठने लगे थे. हार के बाद पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से कुछ कम लेकिन उनके सगे भतीजे अभिषेक बनर्जी को लेकर दर्जनों टीएमसी नेताओं और प्रवक्ताओं ने खुलकर नाराजगी जाहिर करना शुरू कर दिया. इसकी कीमत तीन नेताओं को पार्टी से बर्खास्तगी के रूप में चुकानी पड़ी.

पार्टी में बगावत या भगदड़?

TMC के कार्यकर्ताओं और प्रवक्ताओं के एक वर्ग में बढ़ता असंतोष अब कार्रवाई की सीमा तक पहुंच चुका है. शनिवार को TMC ने पार्टी विरोधी बयान देने के आरोप में अपने तीन प्रवक्ताओं को छह साल के लिए निलंबित कर दिया. हालांकि इससे पार्टी के भीतर उठ रही नाराजगी थमती नहीं दिख रही, क्योंकि सत्ता से बाहर होने के बाद कई नेता खुलकर बोल रहे हैं. 

ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी अपने खिलाफ कैसे सुन सकते हैं?

टीएमसी के प्रवक्ता रिजू दत्ता, जो अक्सर न्यूज़ चैनलों की डिबेट में पार्टी का पक्ष रखते थे, उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो जारी कर मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और अन्य BJP नेताओं से पुराने अपमानजनक” बयानों के लिए माफी मांगी है. दत्ता ने दावा किया कि विपक्ष के नेता रहने के दौरान TMC के अंदर से उन पर दबाव और धमकियां दी जाती थीं कि वे BJP नेताओं के खिलाफ तीखे बयान दें. उन्होंने BJP की तारीफ करते हुए कहा कि बीजेपी ने अपने प्रवक्ताओं और नेताओं को की सुरक्षा और सम्मान का पूरा ध्यान दिया. लेकिन टीएमसी के नेताओं ने उन्हें बेइज्जती करके भगा दिया गया.

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अभिषेक बनर्जी ने मांगे थे पांच करोड़!

पूर्व क्रिकेटर और पूर्व मंत्री मनोज तिवारी ने भी TMC पर बड़ा आरोप लगाया. उन्होंने दावा किया कि 2026 पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में टिकट पाने के लिए हर उम्मीदवार से 5 करोड़ रुपये मांगे गए थे, जिसे देने से उन्होंने इनकार कर दिया. मनोज तिवारी ने अपनी सरकार के पूर्व मंत्री अरूप बिस्वास पर खेलों की समझ न होने का आरोप भी लगाया. 

वहीं टीएमसी की प्रवक्ता कोहिनूर मजूमदार और कार्तिक घोष को भी अनुशासनहीनता के आरोप में निलंबित किया गया है. कोहिनूर मजूमदार ने मीडिया से कहा था कि पार्टी नेताओं को अभिषेक बनर्जी तो इतने बड़े लाट साहब थे कि उनसे मिलने के लिए कई-कई घंटों तक इंतजार करना पड़ता था.

गांधारी बनकर कौन पट्टी बांधे रहा?

वहीं मालदा के एक वरिष्ठ टीएमसी नेता कृष्णेंदु नारायण चौधरी ने भी हार के लिए अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली, वरिष्ठ नेताओं से दूरी और पहुंच की कमी को जिम्मेदार ठहराया. इसी तरब पापिया घोष और उनके पिता रवींद्रनाथ घोष ने भी सार्वजनिक रूप से पार्टी नेतृत्व की आलोचना की है. इसके अलावा पार्टी के कई अन्य नेताओं ने ममता बनर्जी पर अभिषेक बनर्जी की गलतियों पर पर्दा डालकर उन्हें खुली छूट देने का आरोप लगाया. कुछ नेताओं ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि अभिषेक बनर्जी टीएमसी को किसी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के मालिक की तरह चला रहे थे. 

इससे इतर बीजेपी नेताओं का कहना है कि डायमंड हॉर्बर से लेकर पूरे बंगाल में चल रहे कट मनी का खेल अभिषेक बनर्जी के इशारे पर होता था.

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Shwetank Ratnamber

श्वेतांक रत्नाम्बर पत्रकारिता जगत में 22 साल का अनुभव रखते हैं. देश-दुनिया की खबरों को आसान भाषा में बताने में महारत रखने वाले श्वेतांक को राजनीतिक और अंतर्राष्ट्रीय खबरों की गहरी समझ है. ZEE न्यूज...और पढ़ें

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