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ऋषिकेश में लक्ष्‍मण झूला बंद होने के बाद वीरान हुई सैलानियों की सबसे पसंदीदा जगह

15 जुलाई को ऋषिकेश प्रशासन ने झूला पुल को पूरी तरह बंद कर दिया है.

ऋषिकेश में लक्ष्‍मण झूला बंद होने के बाद वीरान हुई सैलानियों की सबसे पसंदीदा जगह
लक्ष्‍मण झूला बंद होने से छोटे व्यापारियों के लिए अपना गुजर बसर करना भी बहुत मुश्किल हो चुका है.

ऋषिकेश: लक्ष्मण झूला बंद होने से देश-विदेश के सैलानियों की ऋषिकेश में सबसे पसंदीदा जगह वीरान है. 15 जुलाई को प्रशासन ने झूला पुल को पूरी तरह बंद कर दिया है. इस समय केवल स्थानीय लोग और स्कूली छात्र-छात्राओं को ही इस पुलस से गुजरने की इजाजत है. लक्ष्मण झूला बंद होने से टिहरी गढ़वाल के तपोवन बाजार और पौड़ी गढ़वाल के लक्ष्मण झूला बाजार बुरी तरह प्रभावित हुआ है. आलम ये है कि अब छोटे व्यापारियों के लिए अपना गुजर बसर करना भी बहुत मुश्किल हो चुका है. 

इन दिनों कावडियों और पर्यटकों से गुलजार रहता था लक्ष्मण झूला बाजार
लक्ष्मण झूला में इन दिनों रौनक हुआ करती थी. कावड़ यात्रा चरम पर होने के बावजूद भी बाजार में सन्नाटा पसरा है. कावड़ यात्री के साथ ही पर्यटक भी बड़ी संख्या में यहां पहुचते थे. विदेशों पर्यटकों से भी लक्ष्मण झूला गुलजार रहता था. प्रशासन ने ना सिर्फ झूला पुल पर प्रतिबंध लगाया है, बल्कि बैराज से गरुडचट्टी पुल की तरफ कावडियों के वाहनों को भी रोक दिया है. नतीजनत, कावडियों के वाहन राष्ट्रीय राजमार्ग से होकर जा रहे है. 

पिछले 40 सालों से लक्ष्मण झूला पुल पर फड़ लगाकर अपना गुजर बसर कर रही पूनम वर्मा से करोबार के बारे में पूछा तो वो फफक फफक कर रो पड़ी. पूनम अपने पति के साथ पिछले 40 सालों से यहां रह रही है. 4 लड़कियों की जिम्मेदारी और ऊपर से करीब डेढ़ लाख का लोन लेकर सामान भरा था, ताकि कावड़ मेला में सामान बिक सके.

लेकिन 17 जुलाई से जैसे ही कावड़ यात्रा शुरु हुई उससे पहले ही प्रशासन ने लक्ष्मण झूला को राज्य सरकार के निर्देश पर प्रशासन ने बंद कर दिया. केवल पूनम ही नही, बल्कि 40 छोटे छोटे फड़ लगाने वाले दुकानदार हैं, जिनकी रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है. हालात ये है इन व्यापारियों के सामने दोहरी चिंता सता रही कि एक तरफ बिक्री नही हो रही है दूसरी तरफ लोन से ली गई धनराशि कैसे देंगे.

हर दिन पर्यटकों,श्रद्वालुओं और पुलिस में हो रहा है टकराव
ऋषिकेश घूमने आए पर्यटक बड़ी उम्‍मीद के साथ लक्ष्‍मण झूला देखने पहुंच रहे हैं. लेकिन, पुलिस-प्रशासन उन्हें लक्ष्‍मण झूला की तरफ जाने की इजाजत नहीं दे रही है. जिससे वे मायूस नजर आ रहे है. तपोवन की तरफ टिहरी पुलिस प्रशासन मुस्तैद है, तो लक्ष्मण झूला बाजार की तरफ पौड़ी गढ़वाल पुलिस की टुकड़ी तैनात है, जो हर कावडिए और पर्यटकों को टांट कर भगा रही है.

करीब आधा दर्जन ग्रामीण भी इस पुल के सहारे जाते थे गांव
लक्ष्मण झूला पुल स्थानीय लोग, पर्यटक और व्यापारियों का ही नही बल्कि करीब आधे दर्जन गावों के आवागमन का जरिया था. इस पुल से किरमोला, जोंक, पटना, धोतिया, कढाई काटल, खैराड़ी, खैरगढ गांव प्रमुख है. धोतिया गांव निवासी मदन सिंह बिष्ट कहते है कि सरकार ने तुगलकी फरमान सुनाते हुए लक्ष्मण झूला पुल को बंद करने का आदेश सुना दिया, लेकिन कोई वैकल्पिक व्यवस्‍था नहीं की. इतना ही नहीं प्रशासन और पुलिस का रवैया इस प्रकरण में काफी नाकारात्मक है.

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ऐतिहासिक ही नहीं, पौराणिक भी है लक्ष्मण झूला पुल
पिछले 40 सालों से लक्ष्मण झूला पुल में रत्नों, मूर्तियों का व्यापार कर रहे नरेन्द्र सिंह धाकड बताते हैं कि ये पुल ऐतिहासिक ही नहीं, बल्कि पौराणिक भी है. 1924 से पहले यहां पर लकड़ी और जूट की रस्सियों का पुल था, जिसे स्वामी विशुद्वानंद की प्रेरणा से सेठ सूरजमल ने 1889 में बनाया था. यह पुल 1924 की बाढ़ में बह गया. उसके बाद अंग्रेजों ने इस स्थान पर 1927 में पुल का निर्माण शुरु किया गया और 1929 में वर्तमान झूला पुल का निर्माण पूरा हुआ. 11 अप्रैल 1930 से इस पुल पर आवागमन शुरु कर दिया गया. 

ये झूला पुल 137 मीटर लंबा है. नरेन्द्र सिंह धाकड़ बताते है कि अधिकारियों के लापरवाही के कारण इस पुल का भार बढता गया. नरेन्द्र धाकड़ बताते हैं कि पहले इसमें लोहे की शीट और पतला डामर किया गया, लेकिन पीडब्लूडी ने इसमें मोटी स्लैब लगा दिए और उसके ऊपर लोहे की शीट लगाकर डामर कर दिया. वे कहते है ये झूला पुल इतना मजबूत है कि इसमें गाडियां भी चलती थी.

कावड़ मेला खत्म होने के बाद व्यापारी करेंगे आंदोलन 
लक्ष्मण झूला में इस समय करीब 50 दुकानें और होटल है जो इससे सीधे प्रभावित है. टिहरी गढ़वाल के तपोवन क्षेत्र में भी कमोवेश यही स्थिति है, यहां भी करीब 1 हजार से अधिक छोटे बडे व्यापारी है जो ऐतिहासिक लक्ष्मण झूला के बंद होने से मुश्किल में है. व्यापारियों ने सीधे प्रशासन को चुनौती दी है कि अगर कांवड़ मेला खत्म होने के बाद लक्ष्मण झूला पर आवाजाही शुरु नही हुई तो बड़ा आंदोलन खडा किया जाएगा.