RPF ने जनवरी 2017 से अगस्त 2018 तक रोजाना करीब 30 बच्चों को पहुंचाया घर

जनवरी 2017 से इस साल अगस्त तक 20 महीनों में आरपीएफ ने 20,000 से ज्यादा बच्चों को बचाया है.

RPF ने जनवरी 2017 से अगस्त 2018 तक रोजाना करीब 30 बच्चों को पहुंचाया घर
2018 में (अगस्त तक) बाल कल्याण समितियों और एनजीओ की मदद से बल ने 8,963 बच्चों को उनके घर भेजा है.

नई दिल्ली: रेलवे सुरक्षा बल ने जनवरी 2017 से इस साल अगस्त तकरीबन 30 बच्चों को रोज बचाया है, जबकि 2017 के पहले के तीन वर्षों में रोजाना 20 से कम बच्चों को बचाया था. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी 2017 से इस साल अगस्त तक 20 महीनों में आरपीएफ ने 20,000 से ज्यादा बच्चों को बचाया है, जबकि 2014, 2015 और 2016 में इतनी ही संख्या में ऐसे बच्चों को घर भेजा था. आंकड़ों के अनुसार, 2017 में 11,178 बच्चों को बचाया गया, जबकि 2018 में (अगस्त तक) बाल कल्याण समितियों और एनजीओ की मदद से बल ने 8,963 बच्चों को उनके घर भेजा है.

20,141 बच्चों को बचाया जीआरपी ने
इन 20 महीनों में जीआरपी ने कुल 20,141 बच्चों को बचाया यानी हर महीने करीब 1,000 और रोजाना तकरीबन 30 बच्चों को बचाया. आरपीएफ ने 2014 में 5,294, तो 2015 में 7,044 बच्चों को बचाया, जबकि 2016 में इसने 8,593 बच्चों को उनके घर भेजा. इन 36 महीनों में कुल 20,931 बच्चों को बचाया गया यानी 581 बच्चों को प्रति महीने और तकरीबन 20 बच्चों को प्रति दिन बचाया गया. आरपीएफ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बचाए जा रहे बच्चों की बढ़ती संख्या का मतलब यह नहीं है कि उनके साथ जुड़े अपराधों की संख्या में समान वृद्धि हुई है.

पहले से ही सक्रिय हो जाती है जीआरपी 
आरपीएफ के महानिरीक्षक जय सिंह चौहान ने बताया, ‘‘हम रेलवे परिसरों में सुरक्षा की जरूरत रखने वाले बच्चों की पहचान करने में और उनके अपराध में पड़ने से पहले उन्हें घर भेजने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं. इससे पहले, हमारी भूमिका तब होती थी जब अपराध हो जाता था.’’ उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए हम पहले की तुलना में अब और बच्चों को बचा रहे हैं.’’ 

(इनपुट भाषा से)