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आज राज्यसभा में पेश होगा RTI संशोधन विधेयक, विपक्षी दल कर रहे हैं जमकर विरोध

राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने सदन में बुधवार को सरकार के सामने मांग रखी है, उन्होंने कहा कि हमें लगता है कि आरटीआई कानून में जो संशोधन लाया जा रहा है उससे राज्य सरकारों के अधिकार पर भी असर पड़ रहा है.

आज राज्यसभा में पेश होगा RTI संशोधन विधेयक, विपक्षी दल कर रहे हैं जमकर विरोध
बीजेडी और टीआएस जैसे गैर-एनडीए गैर-यूपीए दल इसके खिलाफ खड़े हो गए हैं. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: आरटीआई पर लोकसभा में हुई सरकार और विपक्ष की तीखी तकरार के बाद भी सूचना का अधिकार कानून (आरटीआई) संशोधन विधेयक निचले सदन से पारित हो गया. ये बिल गुरुवार (25 जुलाई) को राज्यसभा में पेश किया जाएगा. वहीं, आरटीआई कानून में संशोधन के खिलाफ अभी भी विरोध हो रहा है.

गुलाम नबी आजाद ने रखी ये मांग 
राज्यसभा में बिल पेश किए जानें से पहले राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने सदन में बुधवार को सरकार के सामने मांग रखी है, उन्होंने कहा कि हमें लगता है कि आरटीआई कानून में जो संशोधन लाया जा रहा है उससे राज्य सरकारों के अधिकार पर भी असर पड़ रहा है. हमारी मांग है कि सूचना अधिकार (संशोधन) बिल को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाए.

सरकार की तरफ से नहीं आया कोई जवाब
हालांकि, सरकार की तरफ से अभी कोई जवाब नहीं आया है. राज्यसभा में सदन के नेता थावरचंद गहलोत ने कहा कि बिल अभी सदन में पेश भी नहीं हुआ है और इस पर आगे कुछ भी कहने का फिलहाल अभी कोई औचित्य नहीं है.

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विपक्षी कर रहे हैं जमकर विरोध
आपको बता दें कि बुधवार को राज्यसभा में सूचना अधिकार (संशोधन) बिल का जमकर विरोध हुआ. विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार सूचना अधिकार कानून को कमजोर करना चाहती है और अहम बिलों को संसदीय समितियों की समीक्षा के बगैर लोकसभा में पारित कराती जा रही है. बीजेडी और टीआएस जैसे गैर-एनडीए गैर-यूपीए दल इसके खिलाफ खड़े हो गए हैं.  संसद के बाहर आरटीआई एक्टिविस्ट और कई पूर्व सूचना आयुक्त भी विरोध में सामने आ गए हैं.

राज्यसभा की मंजूरी के बाद आएगा ये बदलाव 
- मुख्य सूचना आयुक्त और आयुक्तों के वेतन, भत्ते और सेवा शर्तें मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्तों के बराबर होंगी. पहले मुख्य सूचना आयुक्त को सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश के समान वेतन भत्ता मिलता था.
- वेतन-भत्ते और शर्तें केंद्र सरकार तय करेगी, मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्तों का कार्यकाल पांच की जगह तीन साल का होगा.