रश्दी ने लेखकों का समर्थन किया, 12 और लेखकों ने साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाया

बुकर पुरस्कार से सम्मानित लेखक सलमान रश्दी भी ‘सांप्रदायिकता के जहर के प्रसार’ और देश में ‘बढ़ती असहिष्णुता’ के खिलाफ अग्रणी लेखकों के बढ़ते विरोध प्रदर्शन में सोमवार को शामिल हो गए। उधर, 12 और लेखकों ने अपना साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाने का फैसला किया।

रश्दी ने लेखकों का समर्थन किया, 12 और लेखकों ने साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाया

नई दिल्ली : बुकर पुरस्कार से सम्मानित लेखक सलमान रश्दी भी ‘सांप्रदायिकता के जहर के प्रसार’ और देश में ‘बढ़ती असहिष्णुता’ के खिलाफ अग्रणी लेखकों के बढ़ते विरोध प्रदर्शन में सोमवार को शामिल हो गए। उधर, 12 और लेखकों ने अपना साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाने का फैसला किया।

रश्दी ने अपने ट्वीट में कहा, ‘‘मैं नयनतारा सहगल और कई अन्य लेखकों के विरोध प्रदर्शन का समर्थन करता हूं। भारत में अभिव्यक्ति की आजादी के लिए खतरनाक समय।’’ जवाहर लाल नेहरू की 88 वर्षीय भांजी सहगल उन शुरूआती लोगों में थीं जिन्होंने असहमति की आवाज उठाने पर लेखकों और अंधविश्वास विरोधी कार्यकर्ताओं पर बार-बार हमले को लेकर अकादमी की चुप्पी के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया था।

कश्मीरी लेखक गुलाम नबी खयाल, उर्दू उपन्यासकार रहमान अब्बास, कन्नड लेखक और अनुवादक श्रीनाथ डी एन ने कहा कि वे अपना साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटा रहे हैं।

श्रीनाथ के साथ ही हिंदी लेखकों मंगलेश डबराल और राजेश जोशी ने आज कहा कि वे अपने प्रतिष्ठित साहित्य अकादमी पुरस्कारों को लौटा देंगे वहीं वरयाम संधु और जी एन रंगनाथ राव ने अकादमी को अपने फैसले की सूचना दे दी है । खयाल ने भी इन लेखकों के समर्थन में उतरते हुए कहा कि आज देश में अल्पसंख्यक ‘‘असुरक्षित और डरा हुआ’’ महसूस कर रहे हैं।

दिल्ली की रंगमंच कलाकार माया कृष्ण राव ने भी दादरी में एक व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या किए जाने और देश में बढ़ती असहिष्णुता के खिलाफ अपना संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार आज लौटा दिया। उन्होंने नागरिकों के अधिकारों के पक्ष में बोलने में सरकार के विफल रहने पर निराशा जाहिर की।

पंजाब के चार और लेखक और कवि----सुरजीत पत्तर, बलदेव सिंह सडकनामा, जसविंदर और दर्शन बट्टर सांप्रदायिक हिंसा के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में आज शामिल हुए और कहा कि वे भी विरोध स्वरूप अपना पुरस्कार लौटा रहे हैं।

इसके साथ ही कम से कम 21 लेखकों और कवियों ने अपना पुरस्कार लौटाने के फैसले की घोषणा की है। कुछ ने चेतावनी दी है कि देश में अल्पसंख्यक आज असुरक्षित और भयभीत महसूस कर रहे हैं।

लेखकों ने चेतावनी देते हुए कहा, ‘‘सांप्रदायिकता का जहर देश में फैल रहा है और लोगों को बांटने का खतरा बड़ा है।’’ कई जगहों से निशाने पर आने के बाद अकादमी ने 23 अक्तूबर को कार्यकारिणी बोर्ड की एक बैठक बुलाई है।

साहित्य अकादमी के अध्यक्ष विश्वनाथ प्रसाद तिवारी ने कहा कि संस्थान भारत के संविधान में वर्णित मुख्य धर्मनिरपेक्षता के मूल्यों को लेकर प्रतिबद्ध है।