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Saga Group Art Exhibition: प्रकृति के प्रेम ने एक डॉक्टर को आर्टिस्ट बना दिया

अखिल भारतीय ललित कला और शिल्प सोसायटी के सभागार में 'सागा' नाम से एक सामूहिक चित्र प्रदर्शनी का शो चल रहा है. 

Saga Group Art Exhibition: प्रकृति के प्रेम ने एक डॉक्टर को आर्टिस्ट बना दिया

दिल्ली: अखिल भारतीय ललित कला और शिल्प सोसायटी के सभागार में 'सागा' नाम से एक सामूहिक चित्र प्रदर्शनी लगी हुई है.यहां कई राज्यों से आए कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे हैं. इस प्रदर्शनी की क्यूरेटर चांदनी गुलाटी ने बताया कि इस शो की थीम 'सागा' है. सागा का अर्थ कथा, कहानी या घटना होता है. यह शो 10 मई से लेकर 16 मई तक चलेगा. 6 दिनों तक चलने वाली इस प्रदर्शनी में डॉ. नीरजा चांदना पीटर्ज ने आज की दौर में प्रकृति और उसके तत्वों को अपनी कला के जरिये उकेरने की शानदार कोशिश की है. कहा जाता है कि कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो मंजिल मिल ही जाती है.

नीरजा बहुमुखी प्रतिभा की धनी हैं.
डॉ. नीरजा चांदना पीटर्ज कुछ इसी अंदाज में कैनवास पर कूची चला लक्ष्य की ओर कदम बढ़ा रही हैं. नीरजा बहुमुखी प्रतिभा की धनी हैं. वह डॉक्टर, आर्टिस्ट, डांसर के साथ-साथ बहुत अच्छा वक्ता भी है. नीरजा को प्रकृति से भी बहुत लगाव है. इसलिए उन्होंने अपनी पेंटिंग्स का विषय प्रकृति और उसके तत्वों को चुना है. इसे वे काल्पनिक और अर्ध काल्पनिक रूप में अपने कैनवस पर उतारती हैं. 

नीरजा अपनी पेंटिग्स पर ब्रश को काफी आजाद ख्याल से उन्मुक्त होकर चलाती हैं.
नीरजा की की पेंटिग्स कुदरती जिंदगी के तमाम स्वाद, पहलुओं और विभिन्न रंगों की झलक से लोगों को रूबरू कराने के लिए कई आकार और डिजाइन पर फोकस करती है. उनकी पेंटिग्स में पाए जाने वाले आकार या ढांचे कुदरत की शुद्ध और स्वाभाविक रचनाओं से लिए गए हैं. नीरजा अपनी पेंटिग्स पर ब्रश को काफी आजाद ख्याल से उन्मुक्त होकर चलाती हैं.

यह खूबी उनकी हरेक पेंटिंग में दिखाई देती है. नीरजा की पेटिंग्स उनकी कला से आगे बढ़कर जिंदगी की हकीकत के अछूते सार तत्व से रूबरू कराती है. जब वह बड़े कैनवास पर अपनी कलाकारी के जौहर दिखाती हैं तो उनकी पेटिंग काफी बारीकी और गहराई से विषय को उभारकर कला के कद्रदानों को चित्रकारी के वास्तविक अर्थ से परिचित कराती है.

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नीरजा अपने कैनवास के हर रंग का चुनाव बेहद सावधानी से करती है.
नीरजा अपने कैनवास के हर रंग का चुनाव बेहद सावधानी से करती है. नीरजा कहती हैं, 'प्रकृति और हममें यानी जीव-जंतुओं में बहुत ज्यादा फर्क नहीं है. और यह बात मुझे अच्छी लगती है. इसी वजह से मैं प्रकृति के करीब हूं और उसके मूड्स को कैनवस पर उतारने की कोशिश करती हूं.'  नीरजा का मानना है कि जब कोई भी आर्टिस्ट अपने दिल की अंदरूनी आवाज के कंपन से प्रभावित होकर पेंटिंग करता है तो उसमें ऐसी बेमिसाल सुंदरता दिखाई देती है, जिसका कोई ओर या छोर नजर नहीं आता."