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अब सोशल मीडिया, फेसबुक, व्‍हाट्सएप के खिलाफ याचिकाओं की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में होगी

सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाओं को हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट ट्रांसफर किया.

अब सोशल मीडिया, फेसबुक, व्‍हाट्सएप के खिलाफ याचिकाओं की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में होगी

नई दिल्‍ली: मद्रास, मध्यप्रदेश और बॉम्बे हाईकोर्ट में सोशल मीडिया, फेसबुक और व्हाट्सएप के खिलाफ दायर याचिकाओं की सुनवाई अब सुप्रीम कोर्ट में होगी. सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाओं को हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट ट्रांसफर किया. जनवरी में होगी सुनवाई.
याचिकाओं में माँग की गई है कि अगर कोई सोशल मीडिया में ग़लत व आपत्तिजनक पोस्ट करता है तो उसके ख़िलाफ़कार्रवाई के लिए उसकी तुरंत पहचान करने के लिए कोई गाइडलाइन बने व आधार से लिंक किया जाए

फेसबुक की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, ट्विटर, गूगल और यूट्यूब को नोटिस जारी किया था. फेसबुक ने सोशल मीडिया प्रोफाइल के साथ आधार लिंक करने वाली याचिकाओं की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में करने के लिए याचिका दायर की थी. जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए नोटिस जारी किए. सोशल मीडिया प्रोफाइल से आधार लिंक करने को लेकर मद्रास हाईकोर्ट, बॉम्बे और मध्य प्रदेश में मामले लंबित हैं. बेंच ने इस मामले पर सुनवाई करने से हामी भरी, लेकिन कोई भी अंतिम फैसला देने के लिए इनकार कर दिया.

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सुप्रीम कोर्ट में तमिलनाडु सरकार की तरफ से कहा गया कि सभी के सोशल मीडिया प्रोफाइल को आधार नंबर से लिंक करना जरूरी है. जिससे फेक और नफरत फैलाने वाले लोगों की तुरंत पहचान की जा सके. साथ ही इससे देश विरोधी और आतंकी सामग्री को भी पहचाना जा सकता है.फेसबुक ने अपने यूजर्स के प्रोफाइल के साथ 12 नंबर के आधार नंबर जोड़ने को प्राइवेसी के साथ खिलवाड़ बताया. उनकी तरफ से कहा गया कि फेसबुक और व्हाट्सऐप यूज करने वाले करोड़ों लोग हैं, जो अपने-अपने तरीके से इसका इस्तेमाल करते हैं. इसीलिए इसके लिए कई चीजों को देखना जरूरी होगा.

आधार लिंक करने से यूजर्स के गोपनीयता अधिकारों को छीनने जैसा होगा.हालांकि सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में दलील दी गई कि मैसेज भेजने वाले का पता लगाने के लिए हमारे पास कोई जरिया नहीं है. हम ये पता नहीं लगा सकते हैं कि कोई वायरल या हिंसक पोस्ट कहां से शुरू हुई है. इसीलिए ऐसा कोई तरीका खोजना जरूरी है जिससे मैसेज भेजने वाले या पोस्ट लिखने वाले की पहचान हो पाए.