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सुप्रीम कोर्ट ने महिला को विकृत भ्रूण के कारण गर्भपात कराने की इजाजत दी

मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने मुंबई के जेजे हॉस्पिटल के एक मेडिकल बोर्ड द्वारा दी गई रिपोर्ट को ध्यान में रखते हुए यह निर्देश जारी किया. उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुपालन में महिला की जांच की गई थी.

सुप्रीम कोर्ट ने महिला को विकृत भ्रूण के कारण गर्भपात कराने की इजाजत दी
उच्चतम न्यायालय ने चिकित्सकों की राय को ध्यान में रखते हुए एक महिला को अपने 30 हफ्ते के भ्रूण का गर्भपात कराने की इजाजत दी. (file)

नई दिल्ली:  उच्चतम न्यायालय ने चिकित्सकों की राय को ध्यान में रखते हुए एक महिला को अपने 30 हफ्ते के भ्रूण का गर्भपात कराने की आज इजाजत दे दी. दरअसल, चिकित्सकों मानना है कि गर्भस्थ शिशु का हृदय समुचित रूप से विकसित नहीं है. मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने मुंबई के जेजे हॉस्पिटल के एक मेडिकल बोर्ड द्वारा दी गई रिपोर्ट को ध्यान में रखते हुए यह निर्देश जारी किया. उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुपालन में महिला की जांच की गई थी.

क्या कहा कोर्ट ने?
न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की सदस्यता वाली पीठ ने कहा, 'हमने यह दर्ज किया कि याचिकाकर्ता (महिला) गर्भपात कराना चाहती है. हमने इस बारे में दी गई विशेषज्ञ चिकित्सीय राय के आधार पर याचिकाकर्ता के अनुरोध को माना है.' अपनी रिपोर्ट में मेडिकल बोर्ड ने कहा है कि उसे लगता है कि जन्म के बाद शिशु को स्वास्थ्य संबंधी गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ सकता है.

महिला ने किया था सुप्रीम कोर्ट का रुख
महिला ने गर्भस्थ शिशु के हृदय में विकृति होने के आधार पर गर्भपात की इजाजत मांगने के लिए न्यायालय का रूख किया था. न्यायालय ने महिला को कल जेजे अस्पताल जाने को कहा ताकि गर्भपात की प्रक्रिया की जा सके. गौरतलब है कि 'मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी' (एमटीपी) अधिनियम की धारा 3 (2) (बी) 20 हफ्ते से अधिक अवधि के भ्रूण के गर्भपात पर निषेध लगाती है.