व्हाट्सऐप और अन्य मैसेजिंग ऐप पर प्रतिबंध लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इंकार

उच्चतम न्यायालय ने ‘व्हाट्सऐप’ और इस तरह के दूसरे ‘ऐप’ पर सुरक्षा आधार को लेकर प्रतिबंध लगाने की मांग करने वाली एक याचिका खारिज कर दी। याचिका में दावा किया गया था कि ये सेवाएं कानून का उल्लंघन करती हैं।

व्हाट्सऐप और अन्य मैसेजिंग ऐप पर प्रतिबंध लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इंकार

नई दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने ‘व्हाट्सऐप’ और इस तरह के दूसरे ‘ऐप’ पर सुरक्षा आधार को लेकर प्रतिबंध लगाने की मांग करने वाली एक याचिका खारिज कर दी। याचिका में दावा किया गया था कि ये सेवाएं कानून का उल्लंघन करती हैं।

हालांकि, प्रधान न्यायाधीश टीएस ठाकुर और न्यायमूर्ति एएम खानविलकर की सदस्यता वाली पीठ ने याचिकाकर्ता को अपनी शिकायतों के साथ सरकार में उपयुक्त प्राधिकार के पास जाने की छूट दी है। इसने कहा कि याचिकाकर्ता अपनी याचिका के साथ दूरसंचार विवाद निपटारा एवं अपीलीय अधिकरण (टीडीएसएट) का भी रूख कर सकते हैं।

सुनवाई के दौरान पीठ ने ये दलीलें स्वीकार नहीं की कि व्हाट्सऐप जैसी मैसेज सुविधा वाले एप्लीकेशन के एक छोर से दूसरे छोर वाली ‘इंक्रिप्शन’ विशेषता देश के लिए सुरक्षा जोखिम पेश करती है। गौरतलब है कि ‘इंक्रिप्शन’ के जरिए डिजीटल डेटा की गोपनीयता सुरक्षित रखी जाती है।

याचिकाकर्ता सुधीर यादव ने खुद ही पेश होते हुए कहा कि ये मैसेंजर सेवाएं ‘इंडियन टेलीग्राफ एक्ट, 1885’ और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के प्रावधानों का उल्लंघन करती हैं। याचिकाकर्ता ने व्हाट्सऐप के अलावा ‘हाइक’, ‘वाइबर’, ‘सिग्नल’, ‘टेलीग्राम’ और सेक्युर चैट जैसे अन्य मैसेजिंग मंचों का जिक्र किया।

यादव ने अपनी याचिका में कहा है कि आतंकवादी और अपराधी भी व्हाट्सऐप पर आसानी से बात कर सकते हैं और योजना बना सकते हैं जिनका सुपरकंप्यूटरों द्वारा भी पता लगा पाना मुश्किल है क्योंकि 256 बिट के एक इंक्रिप्टेड संदेश को पढ़ पाने में सैकड़ों साल लगता है। व्हाट्सऐप ने अप्रैल में अपने अपडेट में सभी अपने सभी उपयोगकर्ताओं के लिए 256 बिट का इंक्रिप्शन शुरू किया था।