धार्मिक आस्था, विश्वास बनाम मौलिक अधिकार मामले पर SC कल लेगा अहम फैसला

धार्मिक आस्था, विश्वास बनाम मौलिक अधिकार मामले में सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की संविधान पीठ गुरुवार को ये तय करेगी कि क्या पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट "Question of law" तय करने के लिए मामले को बड़ी बेंच में भेज सकता है या नहीं.

धार्मिक आस्था, विश्वास बनाम मौलिक अधिकार मामले पर SC कल लेगा अहम फैसला
फाइल फोटो

नई दिल्ली: धार्मिक आस्था, विश्वास बनाम मौलिक अधिकार मामले में सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की संविधान पीठ गुरुवार को ये तय करेगी कि क्या पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट "Question of law" तय करने के लिए मामले को बड़ी बेंच में भेज सकता है या नहीं.दरअसल, संविधान पीठ वो सवाल भी तय करेगी, जिस पर आगे बहस होगी. इससे पहले सभी पक्षों ने 9 जजों की पीठ के पास अपने-अपने सवाल दे दिए थे. सभी पक्षों के सवालों पर संविधान पीठ विचार करेगी, फिर तय करेगी कि किन सवालों पर सुनवाई की जाए.

पिछली सुनवाई में केंद्र सरकार की तरफ से SG तुषार मेहता ने कहा था कि सभी पक्षों में सवालों को लेकर सहमति नही बन पाई है. पीठ को सवाल खुद तय करने चाहिए जिस पर सुनवाई हो. सवाल जरूरी नहीं कि खुली अदालत में तय हो. सवाल को इन चैंबर तय किया जा सकता है. पक्षकारों की ओर वरिष्ठ वकील फली नरीमन ने पांच जजों के संविधान पीठ द्वारा बड़ी बेंच को भेजे जाने पर सवाल उठाया था और कहा कि क्या इस मामले में पुर्विचार करते समय इस क्षेत्राधिकार का इस्तेमाल किया जा सकता है?

CJI ने कहा था कि सबरीमला मामले को पांच जजों की बेंच ने 9 जजों की बेंच को रेफर किया था. जिसमें सबरीमला ही नहीं ऐसे दूसरे मुद्दे भी है. सुप्रीम कोर्ट के 9 जजों की संविधान पीठ ने कहा था कि हम यहां सबरीमला पुनर्विचार के लिए नहीं हैं बल्कि हम यहां बड़े मुद्दे को तय करने के लिए बैठे हैं. जिसमें सबरीमला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश की मांग जैसे ही मुस्लिम महिलाएं भी मस्जिद में प्रवेश मांग रही हैं. 

साथ ही दाउदी बोहरा में महिलाओं का खतना और पारसी महिलाओं के दूसरे धर्म में शादी करने पर अग्यारी पर रोक को चुनौती दी गई है. CJI जस्टिस बोबड़े ने कहा था कि एक वर्ग का कहना है कि मुस्लिम महिलाएं मस्जिद में तो प्रवेश कर सकती हैं लेकिन वो पुरुषों के साथ इबादत नहीं कर सकतीं. कपिल सिब्बल ने फली नरीमन की बात पर सहमति जताई थी और कहा था कि ये ऐसे मुद्दे हैं जिसका असर सभी धर्मों और वर्गों पर पड़ेगा. आप जो भी बोलेंगे उसका असर सभी पर पड़ेगा इसका असर जाति व्यवस्था पर भी पड़ेगा, आप इसे कैसे तय करेंगे.

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया था कि वो सबरीमला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं के प्रवेश, मस्जिद में महिलाओं के प्रवेश, एक गैर-पारसी से शादी करने वाली पारसी महिलाओं के 'अगियारी' में प्रवेश पर रोक और दाउदी बोहरा समुदाय के बीच महिलाओं के खतना की परंपरा पर भी सुनवाई करेगी.