शिवसेना ने किया भारतीय सैनिकों का अपमान, जानें सामना में क्या-क्या लिखा

 शिवसेना का 54वां शुक्रवार को स्थापना दिवस है. आज के दिन शिवसेना के कुछ बेसिरपैर की बयानबाजी की नुमाइश की है.

शिवसेना ने किया भारतीय सैनिकों का अपमान, जानें सामना में क्या-क्या लिखा
मुखपत्र सामना में लिखा है कि अपने खानपान की वजह से चीनी इंडियन सैनिकों पर भारी पड़े हैं.

मुंबई: शिवसेना का 54वां शुक्रवार को स्थापना दिवस है. आज के दिन शिवसेना के कुछ बेसिरपैर की बयानबाजी की नुमाइश की है. मुखपत्र सामना में लिखा है कि अपने खानपान की वजह से चीनी इंडियन सैनिकों पर भारी पड़े हैं. 

सामने में लिखा गया, "चीन के लोग चमगादड़, छिपकली, तिलचट्टे, अजगर, सांप, मगरमच्छ, कुत्ते, भेड़िये आदि जंगली पशु-पक्षी चटकारे लेकर खा जाते हैं. यही कारण है कि क्रूरता उनकी नस-नस में भरी हुई है. चीनी सैनिकों ने गलवान घाटी में हमारे सैनिकों को घेर लिया, अपहरण किया और कंटीले डंडों से बेरहमी से पीटा.  हिंदुस्तान के सैनिक असावधान थे और चीनी सैनिकों ने अचानक हमला कर दिया. हमारे 20 सैनिकों को बहुत ही क्रूरता से मार डाला. 150 से अधिक सैनिक गंभीर रूप से घायल हैं." 

'यह उकसाना नहीं है क्या?, पंडित नेहरू से मोदी तक! शीर्षक वाले संपादकीय में पीएम मोदी के 'न उकसाने ' वाले बयान पर निशाना साधते हुए  सामना ने लिखा, "मोदी कहते हैं, उकसाने पर माकूल जवाब देंगे. 20 जवानों को बड़ी निर्ममता से शहीद कर दिया गया. ये उकसाना नहीं तो और क्या है? अन्य स्वाभिमानी देश अपने सैनिक पर हमले को देश के स्वाभिमान पर हमला मानकर जवाबी कार्रवाई करते हैं. इसलिए चीनियों ने हमारे 20 सैनिकों को मार दिया, यह उकसाना ही है." 
 
सामना में अमेरिका को भी इसमें घसीट गया है. अखबार लिखता है, "दोनों देशों (भारत-चीन ) के बीच अच्छा रिश्ता बन रहा था जो कि अमेरिका के कारण खराब हो गया. ट्रंप, जिनके लिए मोदी चीन से भिड़ गए हैं, कहा जा रहा है कि वे व्हाइट हाउस में बैठकर हिंदुस्तान-चीन के तनाव पर नजर रखे हुए हैं. इससे क्या होगा? क्या ट्रंप अपने दोस्त मोदी की मदद के लिए कुछ ऐसी ताकत भेजेंगे?" 

'चीनी कंपनियों को लेकर राष्ट्रीय नीति तैयार करे केंद्र'
शिवसेना केंद्र से कह रही है कि वह चीनी कंपनी को अपने शासनवाले महाराष्ट्र से हटा देगी मगर उसे गारंटी चाहिए कि कोई और राज्य उस चीनी कंपनी को नहीं अपनाएगा. "चीन से हमारे देश में आने वाले हजारों सामानों का बहिष्कार किया जाना चाहिए. लेकिन यह स्वदेशी जागरूकता जनता को दिखानी चाहिए. हालांकि हिंदुस्तान में आई कई चीनी कंपनियों का आप क्या करने वाले हो? अगर किसी चीनी कंपनी को महाराष्ट्र से निर्वासित किया तो कोई अन्य राज्य उसके साथ समझौता कर सकता है. इसलिए केंद्र सरकार को चाहिए कि चीनी कंपनियों को लेकर राष्ट्रीय नीति तैयार करे." 

नेहरू के बचाव में भी उतरी शिवसेना
साथ ही बदले हुए सुर के तहत अब नेहरू के बचाव में भी शिवसेना उतर चुकी है. सामना के मुताबिक, "1962 में हमें चीन के एक झटके से अपमानित होना पड़ा. हम उस गलती का ठीकरा पंडित नेहरू पर फोड़ते रहे लेकिन आज के शासकों ने उस गलती से कोई सीख ली है, ऐसा नहीं लगता. रक्षा और विदेश नीति में वैसी ही मनमानी करके हमने अपने 20 सैनिकों को खो दिया और चीन को भी चुनौती दे दी. नेहरू के काल में हमारे सैनिक चीन से लड़ते समय विषम परिस्थितियों से जूझ रहे थे. जूते, हथियारों और गोला बारूद की कमी, अपरिचित क्षेत्र की स्थिति थी. आज सब कुछ है, लेकिन फिर भी चीनियों ने हमारे सैनिकों की क्रूरता से जान ले ली. अगर पंडित नेहरू को दोष देनेवाले आत्मपरीक्षण कर लें तो भी 20 सैनिकों का बलिदान सार्थक हो जाएगा."

गौरतलब है कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे की पत्नी सामना की संपादक हैं और पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय राउत कार्यकारी संपादक हैं.

Zee News App: पाएँ हिंदी में ताज़ा समाचार, देश-दुनिया की खबरें, फिल्म, बिज़नेस अपडेट्स, खेल की दुनिया की हलचल, देखें लाइव न्यूज़ और धर्म-कर्म से जुड़ी खबरें, आदि.अभी डाउनलोड करें ज़ी न्यूज़ ऐप.