JNU के बहाने शिवसेना का बीजेपी पर हमला, कहा- आंदोलन को कुचलना सरकार की दबंगई

शिवसेना के मुखपत्र सामना में लिखा है कि जेएनयू छात्रों के आंदोलन को कुचलना सरकार की दबंगई है.

JNU के बहाने शिवसेना का बीजेपी पर हमला, कहा- आंदोलन को कुचलना सरकार की दबंगई

मुंबई: जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) के छात्रों पर लाठीचार्ज करने को लेकर शिवसेना (Shiv Sena) के मुखपत्र सामना (Saamana) ने बीजेपी (BJP) सरकार पर उंगलियां उठाई हैं. सामना में लिखा है कि जेएनयू के स्टूडेंट्स के मोर्चे पर दिल्ली में अमानवीय लाठीचार्ज हुआ है. 

सामना में मोदी सरकार के लिए दबंगई शब्द का प्रयोग करते हुए लिखा है, '' विद्यार्थियों की मांगें क्या थीं और सरकार ने उन मांगों के संबंध में क्या किया? ये सवाल है. ‘जेएनयू’ के हॉस्टल की फीस बहुत ज्यादा बढ़ा दी गई. गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार के विद्यार्थियों के लिए ये फीस बहुत महंगी है. इसका विरोध करनेवालों के आंदोलन को इस प्रकार कुचलने की आवश्यकता नहीं थी. संबंधित विभाग के मंत्री को विद्यार्थियों की बात सुननी चाहिए थी लेकिन सरकार कहीं शिक्षकों को पीट रही है तो कहीं विद्यार्थियों को कुचल रही है. मांग करते हुए अपनी आवाज उठानेवाले कोई भी हों उन्हें इस प्रकार नेस्तनाबूद करना कहां का न्याय है? ये एक प्रकार की दबंगई है, ऐसा शब्द प्रयोग किया तो उस पर देशद्रोह और राजद्रोह का मुकदमा दायर हो सकता है.''

सामना में बीजेपी की विचारधारा को लेकर भी सवाल खड़े किए गए. शिवसेना मुखपत्र ने लिखा, ''इसी विश्वविद्यालय से निकले डॉ. अभिजीत बनर्जी इस बार के नोबेल पुरस्कार विजेता घोषित हुए और इससे देश की प्रतिष्ठा दुनियाभर में बढ़ी. इस विश्वविद्यालय ने कई अच्छे नेता और विशेषज्ञ देश को दिए हैं लेकिन उसमें से कोई ‘दक्षिणपंथी’ विचारोंवाला नहीं था. इसलिए इस विश्वविद्यालय से अधिकारों के लिए उठनेवाली आवाज को दबाना ही चाहिए, ऐसा सोचकर कानून-व्यवस्था की आड़ में आंदोलनकारी विद्यार्थियों पर अमानवीय लाठीचार्ज करने की नीति दुर्भाग्यपूर्ण है.''

अति कर दी गई
सामना ने लिखा कि कानून-व्यवस्था के नाम पर अति कर दी गई. यही कांग्रेस के राज में होता तो भाजपावाले संसद को सिर पर उठा लेते और ‘अ.भा.वि.प.’ जैसे संगठन देश को बंद करने की घोषणा करते. दिल्ली की सड़कों पर अपनी मांगों के लिए आंदोलन करनेवाले जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के नेत्रहीन, विकलांग विद्यार्थियों को जिस प्रकार से बंधक बनाया गया वो चिंताजनक है. नेत्रहीनों को मारनेवाली पुलिस जनता की सेवक और कानून की रक्षक हो ही नहीं सकती. विद्यार्थियों को मत कुचलो. सरकार इतनी लापरवाह न हो.''