30 साल के गठबंधन में शिवसेना ने एक नहीं कई बार बीजेपी की पीठ में घोंपा है छुरा

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का अपने एक सबसे पुराने सहयोगी शिवसेना के साथ रिश्ते हमेशा नरम-गरम रहे हैं. 

30 साल के गठबंधन में शिवसेना ने एक नहीं कई बार बीजेपी की पीठ में घोंपा है छुरा
.(फाइल फोटो)

नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का अपने एक सबसे पुराने सहयोगी शिवसेना के साथ रिश्ते हमेशा नरम-गरम रहे हैं. बीते 30 सालों में इनके बीच गठबंधन कई बार अपनी लगभग-लगभग समाप्ति की तरफ भी जा चुका है. शिवसेना व भाजपा ने पहली बार 1989 में लोकसभा व महाराष्ट्र के विधानसभा चुनावों के लिए गठबंधन किया था. दोनों ने मिलकर महाराष्ट्र में 1995 में सरकार बनाई और 1999 तक सत्ता में रहे. इस गठबंधन के मनोहर जोशी पहले मुख्यमंत्री बने.जोशी के इस्तीफे के बाद दूसरे शिवसेना नेता नारायण राणे ने उनकी जगह ली. दोनों पार्टियां 1999 से 2014 तक विपक्ष में रहीं. भाजपा 2014 में राज्य व केंद्र की सत्ता में आई.

हालांकि, इन सालों के दौरान शिवसेना कई मौकों पर भाजपा की जानबूझकर उपेक्षा करती रही है. साल 2007 में राष्ट्रपति चुनाव के दौरान शिवसेना ने भाजपा की अगुवाई वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के उम्मीदवार भैरो सिंह शेखावत को दरकिनार कर कांग्रेस की अगुवाई वाले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) की उम्मीदवार प्रतिभा पाटील का समर्थन किया.

शिवसेना ने अपने दलबदलू नेता नारायण राणे से निपटने के लिए अपने सहयोगी भाजपा का तिरस्कार किया. नारायण राणे ने सार्वजनिक तौर पर पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे की आलोचना की थी. राणे ने 2005 में उद्धव की प्रशासनिक क्षमता को लेकर सवाल उठाया था, जिसके बाद उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया.

शिवसेना के संप्रग उम्मीदवार को राष्ट्रपति चुनाव में समर्थन करने के कदम से राजनीतिक हलकों में सनसनी मच गई. शिवनेना ने 2012 में फिर से राजग के उम्मीदवार पी.ए.संगमा की जगह कांग्रेस की अगुवाई वाले संप्रग के उम्मीदवार प्रणब मुखर्जी का समर्थन किया. शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने तब कहा था कि देश की प्रतिष्ठा दांव पर है. बाल ठाकरे ने कहा था, "किसी को दावा नहीं करना चाहिए कि हमने पीठ पर वार किया है या विश्वास को तोड़ा है, हमने यह फैसला देश के सर्वोच्च हित में लिया है."

दोनों पार्टियों में 2014 के विधानसभा चुनाव में और कड़वाहट बढ़ गई, जब दोनों पार्टियों का 25 साल पुराना गठबंधन सीट बंटवारे को लेकर टूट गया और दोनों ने स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ा.