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'सामना' के जरिए शिवसेना का बड़ा आरोप, कहा- पैसों और गुंडों का इस्तेमाल कर रही है BJP

सामना के संपादकीय में लिखा है, ''पिछली सत्ता का उपयोग अगली सत्ता के लिए ‘थैलियां’ बांटने में हो रहा है''

'सामना' के जरिए शिवसेना का बड़ा आरोप, कहा- पैसों और गुंडों का इस्तेमाल कर रही है BJP
सामना में संपादकीय के ज़रिए शिवसेना ने BJP पर जमकर हमला बोला है.

मुंबई: महाराष्ट्र (Maharashtra) में सरकार बनाने के लिए राजनीतिक पार्टियों में चल रही खींचतान के बीच शिवसेना (Shiv Sena) ने अपने मुखपत्र 'सामना' के जरिए सहयोगी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर जमकर हमला बोला है. सामना के संपादकीय में लिखा है कि बीजेपी सत्ता हासिल करने के लिए पैसों और गुंडों का इस्तेमाल कर रही है. शिवसेना ने चेतावनी देते हुए कहा है कि यह हम सिर्फ मुद्दे की बात कर रहे हैं और मुक्के की बात होगी तो उसका भी उत्तर हम देंगे. गुंडों की धौंस और पैसों का प्रसाद कोई बांट रहा होगा तो यहां कोई मरी मां का दूध नहीं पीया है.

महाराष्ट्र की भाग्यरेखा भगवा, पालना कैसे हिलेगा?
राज्य में महायुति की ही सरकार आएगी, ऐसी गर्जना भाजपा के चंद्रकांत दादा पाटील आदि नेताओं ने की है. उनके मुंह में शक्कर क्योंकि सुधीर मुनगंटीवार ने ‘खुश’ खबर मिलेगी, ऐसा दावा किया है. सवाल अब इतना ही है कि वो सरकार निश्चित तौर पर कब आएगी और ये ‘महायुति’ निश्चित तौर पर किसकी व वैसी होगी?

गाड़ी, घोड़ा, बंगला जाने की चिंता
ये दादा आदि ने नहीं बताया. भारतीय जनता पार्टी जिस ‘महायुति’ की बात कर रही है वो आकार में बड़ी हो फिर भी उसमें शामिल कई दलों के एक भी विधायक नहीं हैं. ये बगैर विधायकों का ‘महामंडल’ परसों राज्यपाल से मिला और सरकार गठन के बारे में चिंता व्यक्त की. ये चिंता राज्य की कम, अगली सरकार में अपनी स्थिति क्या होगी, इस पर ज्यादा थी. ये बिना विधायकों वाले महामंडल कल दूसरी सरकार के आने पर पिछला सब कुछ भुलाकर नई सरकार में शामिल नजर आएंगे. ‘निवर्तमान’ कई मंत्री चिंतित हैं. उन्हें भी अपनी सरकारी गाड़ी, घोड़ा, बंगला जाने की चिंता है. उनकी धड़कन बढ़ गई है. पर राज्य की जनता एक सुर में मांग कर रही है कि कुछ भी हो महाराष्ट्र में शिवसेना का ही मुख्यमंत्री होना चाहिए.

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‘थैली’ की भाषा बोल रहे
जिसके पास आंकड़ा होगा, वो सरकार भी बनाए और मुख्यमंत्री भी बनाए, ये हमारा भी मत है. पर भ्रष्टाचार और जुल्म करके कोई राजनीति करेगा और क्षणभंगुर सत्ता का उपयोग करके तोड़-फोड़ करनेवाला होगा तो उस पतित को जनता नहीं छोड़ेगी. सत्ता स्थापना के निमित्त पतितों के जोर से बांग देने का मामला शुरू हो गया है. जिनका भारतीय जनता पार्टी, हिंदुत्व की विचारधारा से रत्ती भर भी संबंध नहीं है, ऐसे कुछ ‘पतित’ नए विधायकों से संपर्क करके ‘थैली’ की भाषा बोल रहे हैं. ऐसी शिकायतें बढ़ रही हैं. ये सब मुख्यमंत्री या भाजपा नेताओं के आशीर्वाद से ही हो रहा है, ऐसा हमारा दावा नहीं है. पर ये तथाकथित वाल्मीकि मानो राज्य के स्थापना की जवाबदारी अपने ऊपर ही है, ऐसा हवाला देकर बंदरबांट कर रहे हैं. यह राजनीतिक झुंडशाही महाराष्ट्र की, शिवराय की परंपरा को शोभा देनेवाली नहीं है. सरकार स्थापित हो और वो महाराष्ट्र की प्रगतिशील परंपरा के अनुरूप हो.

अहमद पटेल और नितिन गडकरी की गुप्त मुलाकात
दिल्ली में अहमद पटेल व केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की गुप्त मुलाकात हुई. उसमें कुछ अलग मंत्रणा हुई, ‘मीडिया’ ने ऐसी खबर पैलाई है. कल गडकरी और अन्य अगुवा नेताओं की भेंट-मुलाकात हुई फिर भी महाराष्ट्र का पत्ता भी नहीं हिलेगा क्योंकि तना और टहनियां मजबूत हैं. अहमद पटेल के ‘भरूच’ जिले में सड़कों की स्थिति खराब है व इन सड़कों के काम के लिए वे देश के सड़क निर्माण मंत्री से मिले होंगे तो उसमें इतनी चिंता क्यों हो? भाजपा के एक वरिष्ठ नेता और निवर्तमान वित्तमंत्री सुधीर मुनगंटीवार पिछले दो दिनों से बारंबार ‘खुशखबरी’ का हवाला दे रहे हैं. अब ये ‘खुशखबरी’ यानी कौन-सी? सरकार की पार्टियों में किसी को पुत्ररत्न की प्राप्ति होनेवाली है या किसी की ‘शादी’ तय हो गई है?

स्वाभिमानी सरकार आएगी
उसके लिए वे लड्डू और बासुंदी बांटने वाले हैं. आखिरकार, हमारे यहां ‘खुशखबरी’ का संबंध शादी या नामकरण विधि से जोड़ा जाता है. यानी ‘खुशखबरी’ का कितना भी दावा करें फिर भी ‘पालना’ हिलेगा क्या? वो वैसे हिलेगा? ये प्रश्न है ही. अब महाराष्ट्र की दृष्टि से एक ही खुशखबरी अपेक्षित है और वो मतलब ‘शिवसेना’ का मुख्यमंत्री शपथ ग्रहण करने वाला है. महाराष्ट्र की किस्मत में एक स्वाभिमानी सरकार आएगी और ऐसा यदि जनता के ललाट पर लिखा होगा तो उस भाग्यरेखा को मिटाने की ताकत किसी में नहीं है क्योंकि ये भाग्यरेखा भगवी है.

हमें चिंता है राज्य की व किसानों की
‘भारतीय जनता पार्टी चर्चा का दरवाजा बंद करके नहीं बैठी है’ ऐसा कहा जा रहा है. हमने भी दरवाजे, खिड़कियां खोल रखी हैं और हवाएं अठखेलियां कर रही हैं. सिर्फ इतनी सतर्कता रखी है कि हवा के साथ कीट-पतंगे अंदर न आ जाएं. घर हमारे भी हैं और वे पक्के सागौन, शीशम की लकड़ियों के और छत-दीवारें मजबूत हैं. मेहमानों के चप्पलों के ढेर आज भी हमारे दरवाजे पर हैं. इसे शिवसेना की अमीरी कहना चाहिए. हमें चिंता है राज्य की व किसानों की.

थैलियां’ बांटने में हो रहा पिछली सत्ता का उपयोग
पिछली सत्ता का उपयोग अगली सत्ता के लिए ‘थैलियां’ बांटने में हो रहा है, पर किसानों के हाथ कोई दमड़ी भी रखने को तैयार नहीं है इसीलिए किसानों को शिवसेना की सत्ता चाहिए. यह हम सिर्फ मुद्दे की बात कर रहे हैं और मुक्के की बात होगी तो उसका भी उत्तर हम देंगे.

मरी मां का दूध नहीं पीया
गुंडों की धौंस व पैसों का प्रसाद कोई बांट रहा होगा तो यहां कोई मरी मां का दूध नहीं पीया है. नैतिक मूल्य विहीन राजनीति नहीं होगी तो अन्याय, भ्रष्टाचार और अत्याचार को संरक्षण मिलता रहेगा. महाराष्ट्र की प्रतिष्ठा धूमिल करके कोई राज्य नहीं कर सकता. शिवसेना वहां तलवार लेकर खड़ी ही है!