VIDEO: पोंगल का जश्न मना रहे थे लोग... तेज रफ्तार मिनी ट्रक ने भीड़ को कुचला

वीडियो मे रिकॉर्ड हुई यह घटना 16 जनवरी की बताई जा रही है. उस वक्त लोग 'कान्नुम पोंगल' मना रहे थे. दरअसल, कोई व्यक्ति अपने मोबाइल कैमरे की मदद से उत्सव में नाच रहे लोगों का वीडियो बना रहा था लेकिन उसी वक्त यह हादसा हो गया और वह भी वीडियो में रिकॉर्ड हो गया.

VIDEO: पोंगल का जश्न मना रहे थे लोग... तेज रफ्तार मिनी ट्रक ने भीड़ को कुचला
एक अनियंत्रित लोडिंग वाहन ने कई लोगों को उस वक्त कुचल दिया जब वे कान्नुम पोंगल का उत्सव सेलिब्रेट कर रहे थे

चेन्नई: तमिलनाडु से पोंगल के जश्न में खलल मना देने वाला एक वीडियो सामने आया है. सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर हो रहे इस वीडियो में जहां एक ओर लोग पोंगल की मस्ती में झूम रहे होते हैं, अपने लोकगीतों की धुन पर थिरक रहे लोगों के ऊपर एक मिनी ट्रक आफत बनकर टूट पड़ता है. इस चौंकाने वाले 18 सेकंड के वीडियो के आठवें सेकंड के फ्रेम में एक मिनी ट्रक की एंट्री होती है और वहां कोहराम मच जाता है. जिसकी नजर तेजी से आ रहे ट्रक पर पड़ जाती है वो तो जान बचाकर इधर-उधर भागता नजर आता है लेकिन कुछ लोग अपनी मस्ती में थिरकते ही रह जाते हैं और ट्रक उन्हें टक्कर मारता आगे बढ़ जाता है.

नहीं हुआ कोई घायल
वीडियो मे रिकॉर्ड हुई यह घटना 16 जनवरी की बताई जा रही है. उस वक्त लोग 'कान्नुम पोंगल' मना रहे थे. दरअसल, कोई व्यक्ति अपने मोबाइल कैमरे की मदद से उत्सव में नाच रहे लोगों का वीडियो बना रहा था लेकिन उसी वक्त यह हादसा हो गया और वह भी वीडियो में रिकॉर्ड हो गया. इतनी बड़ी दुर्घटना के बावजूद सौभाग्य की बात यह रही कि कोई भी गंभीर रूप से घायल नहीं हुआ था. घटना तमिलनाडु के सलेम शहर की बताई जा रही है जहां एक अनियंत्रित लोडिंग वाहन ने कई लोगों को उस वक्त कुचल दिया जब वे कान्नुम पोंगल का उत्सव सेलिब्रेट कर रहे थे.

तमिलनाडु में चार दिनों तक मनाया जाता है पोंगल
तमिलनाडु में पोंगल के दौरान लोग सूर्य, वर्षा और खेतों में काम करने वाले जानवरों का शुक्रिया अदा करते हैं. लोग सुबह जल्दी उठकर और नहाने-धोने के बाद नए कपड़े पहनकर मंदिरों में पूजा के लिए जाते हैं. इस दिन घरों में पारंपरिक भोज बनता है. चकाराई पोंगल के तत्वों को दूध में उबाला जाता है और इसे 'पोंगोलो पोंगल, पोंगोलो पोंगाल' कहा जाता है. शक्कर, घी और दूध से तैयार पारंपरिक भोज का भोग सूर्य को लगाया जाता है और उनका धन्यवाद किया जाता है. सभी पड़ोसी एक-दूसरे को चकराई पोंगल के साथ उत्सव की शुभकामनाएं देते हैं. यह उत्सव चार दिनों तक मनाया जाता है.

पहले दिन को 'भोगी' कहते हैं और इस दिन लोग अपने पुराने कपड़ों और अन्य चीजों को जलाकर नई चीजों से घर को सजाते हैं. उत्सव के दूसरे दिन मुख्य पोंगल उत्सव मनाया जाता है और इस अवसर पर गांवों में खुले मैदान में मीठा पोंगल तैयार किया जाता है. पोंगल के तीसरे दिन का उत्सव मट्टु पोंगल के नाम से जाना जाता है और इस दिन गायों और बैलों को स्नान कराया जाता है और उनके सीगों को रंग कर पूजा की जाती है. इस अवसर पर महिलाएं पक्षियों को रंग-बिरंगे चावलों का भोग लगाकर उनसे अपने भाइयों की सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मांगती हैं. उत्सव के चौथे दिन यानी कान्नुम पोंगल के दिन लोग अपने रिश्तेदारों और दोस्तों से मिलते हैं.