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Shirdi: साईं भक्तों के लिए खुशखबरी, दर्शन के लिए अब 12 हजार लोगों को मिलेंगे ऑनलाइन पास

शिरडी का साईं मंदिर (Sai Baba Temple Shirdi) ही बाबा का समाधि स्‍थल है. बाबा ने अपने आखिरी दिनों में यहीं पर समाधि ली और चिरनिद्रा में लीन हो गए थे.

Shirdi: साईं भक्तों के लिए खुशखबरी, दर्शन के लिए अब 12 हजार लोगों को मिलेंगे ऑनलाइन पास
श्री साईं बाबा के मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या पहले की तरह बढ़ती जा रही है.

शिर्डी: महाराष्ट्र (Maharashtra) के अहमदनगर जिला स्थित शिर्डी के प्रसिद्ध साई बाबा मंदिर (Shirdi Sai Baba Temple) आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या धीरे-धीरे बढ़ रही है, इसलिए अब दर्शन के लिए ‘पूर्व बुकिंग’ अनिवार्य कर दिया गया है. मंदिर न्यास के एक अधिकारी ने रविवार को यह जानकारी साझा की. 

आस्था 'Unlock' के बाद बढ़ी श्रद्धालुओं की संख्या
उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस महामारी के बीच दर्शन के लिए मंदिर को फिर से खोल दिया गया, जिसके बाद शुरूआत में प्रतिदिन तो करीब 6,000 श्रद्धालु आ रहे थे लेकिन अब उनकी संख्या बढ़कर 15,000 पहुंच गयी है. सार्वजनिक अवकाश के दिनों में तो श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ जा रही है.

Covid-19 Protocol के जरिए हो रहे हैं दर्शन
उन्होंने कहा, ‘मंदिर प्रतिदिन अब अधिकतम 12,000 श्रद्धालुओं को कोविड-19 के दिशानिर्देशों के पालन के साथ आने की अनुमति दे सकता है. दर्शन के दौरान श्रद्धालुओं के बीच एक दूसरे से दूरी बनाए रखने पर अधिक बल दिया जाएगा. इसलिए श्रद्धालुओं को अब पूर्व बुकिंग करने के बाद ही आना चाहिए एवं उसके लिए दर्शन पास ऑनलाइन उपलब्ध है.’

उन्होंने कहा कि 10 साल से कम उम्र के बच्चों और 65 साल से अधिक उम्र के लोगों को इस महामारी के दौर में दर्शन के लिए नहीं आना चाहिए.

शिर्डी साईं मंदिर का इतिहास
शिरडी का साईं मंदिर (Sai Baba Temple Shirdi) ही बाबा का समाधि स्‍थल है. बाबा ने अपने आखिरी दिनों में यहीं पर समाधि ली और चिरनिद्रा में लीन हो गए थे. 15 अक्‍टूबर 1918 में जिस स्थान पर बाबा ने अपनी भौतिक देह छोड़ी थी, वहीं उनका मंदिर बनाया गया. बाबा के कुछ भक्त उनके हिंदू होने की बात करते हैं तो कुछ उन्‍हें मुसलमान मानते हैं. लेकिन बाबा धर्म-जाति से परे थे यही वजह है कि उनके दरबार में दोनों ही समुदाय के लोग हाजिरी लगाते हैं.

बाबा ने एक धूनी जलाई थी जिसकी राख को वह उदी (विभूती) कहते थे. उस उदी को वह भक्‍तों को दिया करते थे. उदी के चमत्‍कार से लोगों की भयानक से भयानक बीमारी ठीक हो जाती थी. देखते-देखते लोग उन्‍हें ईश्‍वर का अवतार मानने लगे और उनकी ख्याति शिर्डी के बाहर पूरे हिंदुस्तान में फैल गई. 

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