सिंघु बॉर्डर पर अभी भी मौजूद हैं इतने निहंग सिख, किसान आंदोलन में निभा रहे ये जिम्मेदारी
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सिंघु बॉर्डर पर अभी भी मौजूद हैं इतने निहंग सिख, किसान आंदोलन में निभा रहे ये जिम्मेदारी

Singhu Border Murder Case: पुलिस ने दलित युवक लखबीर सिंह की हत्या के मामले में निहंग सिख सरवजीत को गिरफ्तार किया है. आज कोर्ट में आरोपी सरवजीत को पेश किया जाएगा.

सिंघु बॉर्डर पर अभी भी मौजूद हैं इतने निहंग सिख, किसान आंदोलन में निभा रहे ये जिम्मेदारी

नई दिल्ली: हरियाणा और दिल्ली की सीमा सिंघु बॉर्डर (Singhu Border) पर शुक्रवार को एक दलित युवक लखबीर सिंह की हत्या (Lakhbir Singh Murder Case) कर दी गई. सिंघु बॉर्डर पर लखबीर सिंह को किसान आंदोलन (Farmers Protest) के मंच के पास मार डाला गया. लखबीर सिंह (Lakhbir Singh) को रस्सी से बांधकर लटकाया गया और उसका हाथ काट दिया गया. तड़प-तड़पकर लखबीर सिंह की मौत हो गई.

निहंग सिख ने ली दलित युवक की हत्या की जिम्मेदारी

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक, ज्यादा खून बहने की वजह से लखबीर सिंह की मौत हो गई. एक निहंग सिख सरवजीत ने दलित युवक लखबीर सिंह की हत्या की जिम्मेदारी ली है. पुलिस ने निहंग सिख सरवजीत को गिरफ्तार कर लिया है. आज (शनिवार को) आरोपी सरवजीत को कोर्ट में पेश किया जाएगा.

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सिंघु बॉर्डर पर मौजूद हैं इतने निहंग सिख

जान लें कि सिंघु बॉर्डर पर प्रदर्शन के लिए अभी भी करीब 225 निहंग सिख मौजूद हैं. धरना प्रदर्शन में निहंग सिख पारंपरिक हथियारों के साथ मौजूद हैं. ये हथियारों के साथ धरनास्थल के मुख्य स्टेज पर मौजूद रहते हैं. रात के समय निहंग सिख मुख्य स्टेज की पहरेदारी करते हैं. पारंपरिक हथियारों के साथ घोड़ों पर करतब करते रहते हैं. सिंघु बॉर्डर पर मौजूद मुख्य स्टेज के पीछे अस्थाई तौर पर गुरुग्रंथ साहिब को स्थापित किया गया है.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आई ये बात

बता दें कि शुक्रवार को ही पुलिस ने लखबीर सिंह के शव का पोस्टमार्टम कराया. रिपोर्ट में शरीर पर कई गहरे जख्म होने की बात कही जा रही है. लखबीर के शरीर पर धारदार हथियार से हमला किया गया था. उसके शरीर पर 10 से ज्यादा जख्म के निशान थे. शरीर पर रगड़ के निशान थे. उसकी एक हथेली कटी हुई थी, जो बॉडी से अलग थी. पैर भी कटा हुआ था लेकिन बॉडी से अलग नहीं था.

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अब सिंघु बॉर्डर पर किसानों के धरने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. जहां इस धरने को हटाने को लेकर एक याचिका दायर की गई है. सिंघु बॉर्डर वो जगह है जो कभी कृषि कानूनों के विरोध का केंद्र माना जाती थी. आज की तारीख में ये जगह डर और दहशत का दूसरा नाम बन गई है.

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