चुनाव आयोग (ECI) द्वारा पश्चिम बंगाल में विशेष गहन संशोधन (SIR) के तहत मतदाता सूची के ड्राफ्ट रोल पर राजनीतिक दलों द्वारा दावे और आपत्तियां बढ़ती जा रही हैं.
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West Bengal SIR : चुनाव आयोग (ECI) द्वारा पश्चिम बंगाल में विशेष गहन संशोधन (SIR) के तहत मतदाता सूची के ड्राफ्ट रोल पर राजनीतिक दलों द्वारा दावे और आपत्तियां बढ़ती जा रही हैं. मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) पश्चिम बंगाल के दैनिक बुलेटिन के मुताबिक मंगलवार तक उन्हें राजनीतिक दलों की ओर से कुल 20,94,438 दावे और आपत्तियां प्राप्त हुई हैं. ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल में 7,08,16,630 मतदाताओं के नाम शामिल हैं. राजनीतिक दलों के ब्लॉक लेवल एजेंट्स (बीएलए) द्वारा प्राप्त दावों में मुख्य रूप से नाम शामिल करने के लिए हैं. कुल 8 दावे शामिल करने के लिए आए हैं, जबकि बाहर करने के लिए कोई नहीं.
बीजेपी-टीएमसी-कांग्रेस का आंकड़ा
प्रमुख दलों द्वारा दावें और आपत्तियों की बात करें तो भाजपा ने सर्वाधिक 61,451 दावे किए हैं. दूसरे नंबर पर कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) है, जिसके 49,436 दावे हैं, जिनमें से 2 नाम शामिल करने के लिए हैं. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने 18,772 दावे किए हैं तो बंगाल की सत्ताधारी पार्टी ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने 77,867 दावे किए, जिनमें से 3 नाम शामिल करने के लिए हैं. वहीं ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक ने 1,885 दावे किए, जिनमें से 1 नाम शामिल करने के लिए है. इसी तरह से बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) ने 21 दावे किए, जिनमें से 1 नाम शामिल करने के लिए है.
कुल मिलाकर राष्ट्रीय और राज्य दलों से बीएलए के माध्यम से प्राप्त दावों में केवल 8 नाम शामिल करने की आपत्तियां दर्ज हुईं, जो दर्शाता है कि दलों का फोकस मुख्य रूप से नए या छूटे नाम जोड़ने पर है.
मतदाताओं से सीधे प्राप्त दावे और आपत्तियां भी महत्वपूर्ण हैं. फॉर्म 6 (नए नाम जोड़ने) के तहत 3,31,075 प्राप्त हुए. ड्राफ्ट पब्लिश होने से पहले फॉर्म 7 (नाम हटाने) के तहत 56,867 फॉर्म मिले. ड्राफ्ट प्रकाशन के बाद मतदाताओं से प्राप्त दावे/आपत्तियां (फॉर्म 6/6ए और 7) कुल 3,41,983 (शामिल करने के लिए) और 38,802 (बाहर करने के लिए) हैं. अयोग्य मतदाताओं के लिए एफिडेविट में कोई शामिल/बाहर करने के लिए नहीं आए.
आपको बताते चलें कि एसआईआर प्रक्रिया 2026 विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची को शुद्ध करने के लिए चल रही है, जिसमें 2002 रोल से लिंकेज पर जोर है. ड्राफ्ट रोल में 58.2 लाख नाम हटाए गए थे, जिससे विवाद बढ़ा. जहां एक ओर टीएमसी ने इसे 'एनआरसी का बैकडोर' बताते हुए आरोप लगाया कि इससे वैध मतदाता, विशेषकर अल्पसंख्यक और शरणार्थी प्रभावित हो रहे हैं, वहीं चुनाव आयोग ने इसे मतदाता सूची की पारदर्शिता के लिए आवश्यक बताया. (IANS)