close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

आपकी 'स्मार्ट शॉपिंग' करेगी आतंकवादियों पर सीधा प्रहार, आपके एक सही कदम से टूट जाएगी उनकी कमर

आमतौर पर सामान कहां से आया है, सामान अवैध तो नहीं है, सामान तस्करी (smuggling) का तो नहीं है, ये बातें हमें पता नहीं रहतीं. इसलिए दुकानदार या शॉपिंग मॉल (Shopping Mall) में तस्करी वाला या अवैध सामान या नकली सामान (duplicate product) भी हमारे पास आ जाता है और हमको पता भी नहीं चल पाता.

आपकी 'स्मार्ट शॉपिंग' करेगी आतंकवादियों पर सीधा प्रहार, आपके एक सही कदम से टूट जाएगी उनकी कमर
(प्रतीकात्मक तस्वीर)

नई दिल्ली: कभी आपने सोचा है कि आप अपने मोहल्ले या शहर में बैठे-बैठे ही आतंकवाद (terrorism) का सफाया कर सकते हैं. नहीं सोचा तो हम बताते हैं कैसे... आमतौर पर हम और आप बाजार से अक्सर कोई छोटा-मोटा सामान खरीदते हैं तो उसका बिल (bill) नहीं लेते. आमतौर पर सामान कहां से आया है, सामान अवैध तो नहीं है, सामान तस्करी (smuggling) का तो नहीं है, ये बातें हमें पता नहीं रहतीं. इसलिए दुकानदार या शॉपिंग मॉल (Shopping Mall) में तस्करी वाला या अवैध सामान या नकली सामान (duplicate product) भी हमारे पास आ जाता है और हमको पता भी नहीं चल पाता. अगर हम बिल (Bill) लेने लगें तो वैध सामान या सही सामान मिलने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है. क्योंकि दुकानदार (Shopkeeper) को सामान के आने-जाने और उस पर दिए हुए टैक्स (Tax) का रिकॉर्ड (Record) रखना पड़ता है.

तो अगर आप बिल (Bill) लेने लगें तो अवैध या चोरी-तस्करी के सामानों पर बहुत हद तक लगाम लग सकेगी. वित्त राज्य मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर (Anurag Singh Thakur) के मुताबिक, "नकली माल, तस्करी के माल का ज्यादातर हिस्सा आखिरकार आतंकवाद (terrorism) जैसे कामों में लगाया जाता है, अगर सभी उपभोक्ता हर सामान पर बिल लेने लगे तो देश के खजाने को नुकसान होने से तो बचाया ही जा सकता है इसके साथ ही आतंकवादियों (terrorist) तक भी पैसा जाने से रोका जा सकता है".

वित्त राज्य मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर (Anurag Singh Thakur) के मुताबिक तकनीकी के इस्तेमाल से नकली या तस्करी का सामान किस देश से आ रहा है ये पता लगाया जा सकता है. लेकिन, सभी लोग जागरूक हो जाएं तो इस तरह के काम करने वाले स्त्रोत तक पहुंचा जा सकता है और इसे रोका जा सकता है. उद्योग चैंबर फिक्की (FICCI) की ताजा रिपोर्ट बताती है कि नकली या तस्करी के सामान से अकेले पांच सेक्टर से देश को सालाना 1,17,253 करोड़ रुपए का नुकसान (2017-18 के आंकड़े) हो रहा है. ये पांच सेक्टर हैं टेक्सटाइल, तंबाकू, रेडीमेड गारमेंट, मशीनरी और पार्ट्स, और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स. सिर्फ यही नहीं बल्कि इनकी वजह से देश के 16 लाख से ज्यादा लोगों को अपने जॉब (job) से हाथ धोना पड़ता है.

देखें लाइव टीवी

आंकड़े बताते हैं कि अकेले नकली या तस्करी वाली सिगरेट (cigarette) से 2017-18 में देश को 8750 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ जबकि रेडीमेड गारमेंट (Readymade garment) पर 5509 करोड़ का नुकसान हुआ. सेन्ट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्स एंड कस्टम्स (CBIC) तस्करी और नकली सामान को रोकने में अहम भूमिका निभाता है. CBIC चैयरमेन पी के दास बताते हैं कि इस तरह का अवैध व्यापार से हवाला को बढ़ावा मिलता है और देखा गया है कि टेरर फंडिंग ड्रग्स जैसे काले कारोबार में इस पैसे का इस्तेमाल होता है. नकली या तस्करी के सामान के कारोबार में सामानों की ओवर या अंडर इनवायसिंग भी होती है कई बार गलत तरह से छूट भी लेने की कोशिश की जाती है. फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के नियमों की आड़ में भी सामान खरीदने बेचने की कोशिश होती है. CBIC इसे रोकने के लिए कड़े कदम उठाती है.

गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय कहते हैं कि हम अपनी बॉर्डर को इस तरह बना रहे हैं कि इससे सुई भी एक जगह से दूसरी जगह बिना चेक बैलेंस के न जा पाए. लेकिन सभी लोगों की जागरूकता होगी तो नकली सामानों, तस्करी के सामानों को रोका जा सकता है. नकली सामानों से आम आदमी का स्वास्थ्य भी जुड़ा है इसलिए नकली सामानों पर रोक लगनी जरूरी है. नकली और तस्करी के सामानों की वजह से हमारी मेहनत का पैसा आतंकवादियों की जेब में जाता है इसलिए इसे रोकना है तो कम से कम बिल लेने की शुरुआत करके इसकी कमर तो तुरंत तोड़ी जा सकती है.