ZEE जानकारी: राष्ट्रगान पर बहस से पहले सोचें कि वायु प्रदूषण से होने वाले नरसंहार को कैसे रोका जाए

राष्ट्रगान गाना चाहिए या नहीं गाना चाहिए? ये सवाल तब पैदा होगा जब आप जिंदा बचेंगे. बहस करने से पहले हमें ये सोचना होगा कि वायु प्रदूषण से होने वाले नरसंहार को कैसे रोका जाए.

ZEE जानकारी: राष्ट्रगान पर बहस से पहले सोचें कि वायु प्रदूषण से होने वाले नरसंहार को कैसे रोका जाए

राष्ट्रगान गाना चाहिए या नहीं गाना चाहिए? गोहत्या होनी चाहिए या नहीं होनी चाहिए? देश में असहनशीलता है या नहीं ? ऐसे तमाम मुद्दों पर हमारे देश में लगातार बहस होती रहती है. लेकिन राष्ट्रगान गाने या ना गाने का सवाल तब पैदा होगा जब आप जिंदा बचेंगे. गोहत्या पर बहस करने से पहले हमें ये सोचना होगा कि वायु प्रदूषण से होने वाले नरसंहार को कैसे रोका जाए ? क्योंकि जब सांस लेने के लिए साफ हवा ही नहीं बचेगी और लोग जिंदा ही नहीं बचेंगे तो फिर ये राजनीति और बहस किसके लिए हो रही है.

बड़ा सवाल ये है कि क्या आपको अगले कुछ वर्षों में सांस लेने के लिए शुद्ध हवा भी खरीदनी पड़ेगी ? क्या भविष्य में ऑक्सीजन सबसे महंगी और दुर्लभ वस्तुओं में शामिल हो जाएगी ? ये सवाल किसी साइंस फिक्शन फिल्म के स्क्रीनप्ले से नहीं उठाए गए हैं. ये वो सच्चाई है जिसे आज उत्तर भारत में रहने वाले लोगों ने अपनी आंखों से देखा है. यही हालात रहे तो हो सकता है कि आने वाले समय में ऑक्सिजन पर 28% का लग्जरी जीएसटी भी वसूला जाए. 

दिल्ली वैसे तो देश की राजधानी है और 133 करोड़ की आबादी वाले भारत के सिर का 'ताज' है. लेकिन अगर आज दिल्ली ने अपनी सेल्फी ली होती, तो उस तस्वीर में 'धुएं' के अलावा कुछ दिखाई नहीं देता. ये भारत की सबसे खतरनाक सेल्फी है. क्योंकि इसमें ऑक्सीजन और स्वच्छ हवा की भारी कमी है. 

दिल्ली को खास लोगों का शहर कहा जाता है लेकिन आज यहां के आम और खास दोनों ही तरह के लोग बुरी तरह खांस रहे हैं. आज दिल्ली और उसके आस-पास के इलाकों में दिन के समय ऐसा लग रहा था जैसे कभी भी, कोई सड़क दुर्घटना हो सकती है. धुएं ने दिल्ली और एनसीआर के गले को कसकर पकड़ा हुआ था. आज खुली हवा में सांस लेना बहुत मुश्किल था. कल रात को उत्तर भारत के लोगों ने इस बात की जरा सी भी उम्मीद नहीं की होगी कि आज सुबह की शुरुआत चाय की चुस्कियों के साथ नहीं बल्कि खतरनाक 'धुएं' के साथ होगी और लोग चाय से पहले धुएं वाला जहर पीएंगे.

अभी आप जो तस्वीर देख रहे हैं. वो दोपहर 1 बजकर 20 मिनट की है. इन दोनों ही तस्वीरों में आपको सड़कें तो नजर आ जाएंगी. लेकिन, अगर आप अपनी नजर ऊपर उठाएंगे तो आपको सिर्फ 'दम घोंटने' वाले धुएं के दर्शन होंगे. और ये हालात तब हैं जब दीवाली को खत्म हुए 20 दिन से ज्यादा का वक्त बीत चुका है. आपको याद होगा दीवाली से ठीक पहले, देश में 'पटाखों' के नाम पर खूब 'शोर-शराबा' हुआ था. उस वक्त चर्चा इस बात की थी कि दीवाली के पटाखों से सबसे ज्यादा प्रदूषण फैलता है. लेकिन, सवाल ये है कि जब 

पिछले 2 हफ्तों से 'पटाखों' का शोर और उससे निकलने वाला 'धुआं' नहीं दिखाई दे रहा तो फिर ये जहरीली हवाएं कहां से आ गईं ? और इसे रोकने के लिए किसी ने कुछ किया क्यों नहीं? इस सवाल का जवाब हमारे सिस्टम को देना चाहिए.

वैसे ये वही Smog है जिसके बारे में हमने करीब एक महीने पहले यानी 5 अक्टूबर 2017 को देश के सिस्टम और अलग-अलग राज्यों की सरकारों को सावधान किया था. उस वक्त हमने ये बात कही थी कि कुछ हफ्तों में ही देश की राजधानी दिल्ली और उसके 'आस-पास' की हवा खराब होने वाली है. लेकिन हमारा सिस्टम और सरकारें सोती रहीं और पूरे उत्तर भारत में Smog का साम्राज्य बन गया. आज हालत ये है कि दिल्ली और एनसीआर के साथ साथ कानपुर, इलाहाबाद और ग्वालियर जैसे कई शहरों में प्रदूषण का स्तर बढ़ गया है. 

आज देश की राजधानी दिल्ली के कई इलाके ऐसे थे जहां प्रदूषण फैलाने वाले PM 2.5 का स्तर 703 तक पहुंच गया था. और आपको ये जानकर चिंता हो सकती है कि अगर ये स्तर 300 या उससे ज्यादा हो जाए तो वो आपको बीमार करने के लिए काफी है.

दिल्ली के कुछ इलाके तो ऐसे भी थे जहां की एयर क्वालिटी इतनी खराब थी कि ये एक दिन में 50 सिगरेट पीने के बराबर है.

Smog का स्तर इतना ज्यादा था, कि विजिबिलिटी 500 से 200 मीटर तक सिमट कर रह गई थी. जिसकी वजह से 20 से ज्यादा फ्लाइट्स डिले हो गईं. जबकि, 12 ट्रेन देर से चलीं.

उत्तर प्रदेश और पंजाब सहित देश के कुछ हिस्सों से धुंध और धुएं की वजह से सड़क दुर्घटनाओं की खबरें भी आई हैं. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए इंडियन मेडिकल एसोसिएशन को ये तक कहना पड़ा कि उन्होंने दिल्ली में हेल्थ इमरजेंसी की घोषणा कर दी है. लोगों को ये नसीहत दी गई कि जब तक प्रदूषण का स्तर कम नहीं हो जाता तब तक लोगों को दौड़ना तो दूर मॉर्निंग वॉक भी नहीं करनी चाहिए. 

आईएमए (IMA) की तरफ से दिल्ली के शिक्षा मंत्री को बाकायदा एक चिट्ठी लिखी गई. जिसमें ये अपील की गई, कि स्कूलों को तत्काल प्रभाव से बंद कर देना चाहिए. जिसके बाद दिल्ली सरकार ने फैसला लिया है कि कल, दिल्ली में पांचवीं कक्षा तक के छात्रों के लिए स्कूल बंद रहेंगे.

इस बीच एनजीटी ने, बढ़ते प्रदूषण स्तर के लिए दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा सरकार को फटकार लगाई है. एनजीटी ने ये पूछा है कि सरकारों ने पहले से ही जरूरी कदम क्यों नहीं उठाए ?

वहीं एनवायरमेंट पॉल्यूशन एंड कंट्रोल अथॉरिटी यानी EPCA ने भी तुरंत प्रभाव से दिल्ली में पार्किंग फीस चार गुना करने का निर्देश दिया है. हालांकि अभी ये दिल्ली में लागू नहीं हुआ है. लेकिन दिल्ली और एनसीआर की सरकारें EPCA के निर्देशों को लागू करने के लिए बाध्य हैं, क्योंकि ये सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित की गई अथॉरिटी है. 

ऐसा नहीं है कि सिर्फ दिल्ली और एनसीआर की हालत खराब थी, पूरे हरियाणा में फॉग में धुआं मिलने की वजह से स्मोग की स्थिति पैदा हो गई है. कई इलाके तो ऐसे थे जहां की विजिबिलिटी शून्य थी. यहां आपको ये भी बता दें कि Smog शब्द Smoke और Fog से मिलकर बना है. खतरनाक गैसों और कोहरे के मेल से Smog पैदा होता है. जिसका असर कई दिनों तक रहता है.

आम तौर पर गर्मी के मौसम में धुआं ऊपर की तरफ उठ जाता है. लेकिन, ठंड में ऐसा नहीं हो पाता. जिसकी वजह से 'धुएं और धुंध' का एक जहरीला मिश्रण तैयार हो जाता है, और यही Smog सांस के साथ शरीर के अंदर पहुंचने लगता है.