GST का भुगतान न करने, रिटर्न में खामी पर प्रवर्तक निदेशकों को भेजा जा रहा SMS

GST का भुगतान न करने, रिटर्न में खामी पर प्रवर्तक निदेशकों को भेजा जा रहा SMS

इसके अलावा जीएसटीआर-3बी (संक्षिप्त रिटर्न) और जीएसटीआर-एक (आपूर्ति रिटर्न) में खामी, ई-वे बिल निकालना लेकिन रिटर्न दाखिल नहीं करना आदि में भी रिटर्न भेजा जाता है. 

GST का भुगतान न करने, रिटर्न में खामी पर प्रवर्तक निदेशकों को भेजा जा रहा SMS

नई दिल्ली: जीएसटी नेटवर्क (जीएसटीएन) ने एक ऐसी प्रणाली विकसित की है जिसमें माल एवं सेवा कर (जीएसटी) का भुगतान नहीं करने, रिटर्न दाखिल करने में किसी खामी या कंपनियों द्वारा आईटीसी दावे में अंतर होने की स्थिति में प्रवर्तकों, निदेशकों और मालिकों को स्वत: तरीके से एसएमएस भेजा जा रहा है. 

जीएसटीएन के मुख्य कार्यकारी प्रकाश कुमार ने यह जानकारी दी. उन्होंने कहा कि जब जीएसटी प्रणाली में किसी तरह की चेतावनी भरा सचेत करने वाला संकेत भेजा जाता है तो इसे राजस्व विभाग को भी साझा किया जाता है जिससे कर अधिकारी उचित कदम उठा सकें. 

कुमार ने पीटीआई- भाषा से साक्षात्कार में कहा, ‘‘जब भी जीएसटीआर- 3बी और जीएसटीआर-एक, जीएसटीआर-3बी और ई -वे बिल में किसी तरह का अंतर होता है तो न सिर्फ अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं को बल्कि कंपनी के प्रवर्तकों और निदेशक मंडल में शामिल निदेशकों को भी सतर्क करने वाला चेतावनी संकेत भेजा जाता है. यह अलर्ट रिटर्न दाखिल करने की आखिरी तारीख के बाद तीन दिन में भेजा जाता है.’’ 

प्रणाली के स्तर पर स्वत: ही सृजित होने वाले इन लाल झंडी वाले सतर्क करने वाले पांच संकेतकों में कर भुगतान में चूक और जीएसटीआर-3बी दाखिल नहीं करना, आपूर्तिकर्ताओं द्वारा दायर रिटर्न पर कंपनियों द्वारा इनपुट कर क्रेडिट (आईटीसी) दावे में मेल नहीं होना शामिल है. 

इसके अलावा जीएसटीआर-3बी (संक्षिप्त रिटर्न) और जीएसटीआर-एक (आपूर्ति रिटर्न) में खामी, ई-वे बिल निकालना लेकिन रिटर्न दाखिल नहीं करना आदि में भी रिटर्न भेजा जाता है. 

प्रणाली में चेतावनी के एक बार जनरेट होने के बाद मासिक वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) रिटर्न दाखिल करने की निर्धारित तिथि के तीन दिन बाद कंपनी के प्रवर्तकों और निदेशकों को एमएमएस भेजा जाता है. कारोबार के प्रवर्तकों और निदेशकों को एसएमएस के जरिये सतर्क किया जाता है ताकि गलती को सुधारा जा सके, क्योंकि कई बार उन्हें इस बारे में जानकारी नहीं होती है कि अधिकारियों ने समय पर और सही रिटर्न दाखिल की है अथवा नहीं. 

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