सोनिया ने नोटिस का जवाब देने के लिए सीआईसी से चार हफ्ते का वक्त मांगा

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने राजनीतिक दलों को सूचना के अधिकार कानून के अंतर्गत लाने के केंद्रीय सूचना आयोग के फैसले का पालन नहीं करने को लेकर उनको जारी कारण बताओ नोटिस पर जवाब देने के लिए चार सप्ताह का वक्त मांगा है। दिल्ली चुनाव का हवाला देते हुए सोनिया गांधी ने कहा कि भरसक प्रयास के बावजूद वह निश्चित समय सीमा में शिकायत का जवाब तैयार नहीं कर पायीं।

नई दिल्ली : कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने राजनीतिक दलों को सूचना के अधिकार कानून के अंतर्गत लाने के केंद्रीय सूचना आयोग के फैसले का पालन नहीं करने को लेकर उनको जारी कारण बताओ नोटिस पर जवाब देने के लिए चार सप्ताह का वक्त मांगा है। दिल्ली चुनाव का हवाला देते हुए सोनिया गांधी ने कहा कि भरसक प्रयास के बावजूद वह निश्चित समय सीमा में शिकायत का जवाब तैयार नहीं कर पायीं।

अपने वकील के माध्यम से दायर अपने आवेदन में सोनिया गांधी ने कहा कि कि वह सीआईसी के सामने उपयुक्त जवाब देने के लिए कानूनी सलाह ले रही हैं और आशा है कि चार सप्ताह में जवाब तैयार हो जाएगा। उनके वकील ने आयोग के समक्ष दायर आवेदन में कहा है, ‘समय बढ़ाने का अनुरोध प्रतिवादी के नियंत्रण के बाहर के कारणों की वजह से करना पड़ा। यह आवेदन अच्छी भावना एवं न्याय के हित में दिया गया है। ’

सीआईसी ने सोनिया गांधी को नोटिस जारी कर उनसे इस बात की सफाई देने को कहा था कि क्यों उनकी पार्टी ने आरटीआई सवालों का जवाब देने के बारे में पैनल के निर्देशों का पालन नहीं किया और पिछले साल एक आरटीआई आवेदन का जवाब नहीं दिया। ऐसा ही नोटिस सीआईसी ने भाजपा को भी भेजा है लेकिन उसके अध्यक्ष अमित शाह ने भी जवाब नहीं दिया है।

सीआईसी की पूर्ण पीठ ने घोषणा की थी कि कांग्रेस और पांच अन्य राष्ट्रीय दल- भाजपा, भाकपा, माकपा, राकांपा और बसपा सार्वजनिक प्राधिकार है जो आरटीआई के तहत जवाबदेह है। जाने माने सामाजिक कार्यकर्ता आर के जैन ने पिछले साल फरवरी में कांग्रेस को आरटीआई आवेदन दिया था लेकिन उसपर जवाब नहीं मिलने पर वह सीआईसी चले गए।