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दक्षिण पश्चिमी मॉनसून : अल-नीनो की बदलती स्थिति पर विचार किया, लेकिन आंकड़ें नहीं बदले- जतिन सिंह

दरअसल, मॉनसून 2017 सीजन सामान्‍य से कम बारिश के साथ 30 सितंबर को संपन्‍न हुआ है और इस दौरान देशभर में 95 प्रतिशत बारिश दर्ज की गई...

दक्षिण पश्चिमी मॉनसून : अल-नीनो की बदलती स्थिति पर विचार किया, लेकिन आंकड़ें नहीं बदले- जतिन सिंह
मॉनसून 2017 सीजन सामान्‍य से कम बारिश के साथ 30 सितंबर को संपन्‍न हुआ (फाइल फोटो)

नई दिल्‍ली : इस साल दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के पूर्वानुमान के उलट सामान्‍य से कम रहा. मौसम विभाग समेत कई अन्‍य मौसम एजेंसियों ने अपने पूर्वानुमान में मॉनसून के 96 से 99 फीसदी यानि सामान्‍य रहने की उम्‍मीद जताई थी. हालांकि निजी मौसम एजेंसी स्‍काईमेट का मॉनसून पर पूर्वानुमान काफी हद तक सही रहा. एजेंसी का कहना है कि 'हमने भी अल-नीनो की बदलती स्थिति पर विचार किया, लेकिन उभरते मेडन जूलियन ऑसिलेशन और इंडियन ओशन डायपोल को नज़रअंदाज नहीं किया, लिहाजा उसका पूर्वानुमान सही रहा'.

दरअसल, मॉनसून 2017 सीजन सामान्‍य से कम बारिश के साथ 30 सितंबर को संपन्‍न हुआ है और इस दौरान देशभर में 95 प्रतिशत बारिश दर्ज की गई. इस अवधि में एक जून से 30 सितंबर के बीच कुल 841.3 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई.

स्‍काईमेट द्वारा 28 मार्च को जारी किए गए अपने मॉनसून पूर्वानुमान में 2017 में कमजोर मॉनसून की आशंका व्‍यक्‍त गई थी. एजेंसी ने देशभर में 95 फीसदी बारिश की संभावना जताई थी. वहीं, मौसम विभाग समेत अन्‍य संगठनों ने मॉनसून पूर्वानुमान में समय-समय पर बदलाव किए थे. भारतीय मौसम विभाग ने भी अपना पूर्वानुमान 96 प्रतिशत से बढ़ाकर 98 फीसदी कर दिया था. 

स्‍काईमेट के संस्‍थापक जतिन सिंह ने बताया कि 'एजेंसी ने भी अल-नीनो की बदलती स्थिति पर विचार किया, लेकिन उभरते मेडन जूलियन ऑसिलेशन और इंडियन ओशन डायपोल को नज़रअंदाज नहीं किया. यही वजह है जहां दुनियाभर के कई संगठनों ने देश के दक्षिण-पश्चिम मॉनसून में बदलाव किया, वहीं स्‍काईमेट 95 फीसदी बारिश के अपने पूर्वानुमान पर कायम रहा'. 

उन्‍होंने कहा कि 'अमेरिका के नेशनल ओशनिक एंड एटमोस्फेयरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) और ऑस्ट्रेलिया के आधिकारिक मौसम पूर्वानुमान और मौसम रडार के ब्‍यूरो ऑफ मीटरोलॉजी (BOM) के मॉडल अल-नीनो के अगस्‍त के मध्‍य में कमजोर होने का संकेत कर रहे थे, इसके चलते अगस्‍त और सितंबर के महीनों में मॉनसून के प्रदर्शन में सुधार दिखाया जा रहा था और यही वजह है कि कई एजेंसियों ने अपने पूर्वानुमान में संशोधन करते हुए अधिक बारिश की संभावना जताई'.

एजेंसी का कहना है कि मॉनसून ने भारत में जून में बेहतर प्रदर्शन किया और इस माह में 104 प्रतिशत बरसात दर्ज की गई, जुलाई महीने में भी 102 फीसदी बारिश दर्ज की गई, जोकि सामान्‍य से अधिक रही. हालांकि जुलाई और अगस्‍त में भारी बारिश के चलते देश के कई भागों गुजरात, दक्षिणी राजस्‍थान, मुंबई, असम, बिहार, पूर्वी उत्‍तर प्रदेश के तराई क्षेत्रों और ओडि़शा के कई भाग में बाढ़ का प्रकोप भी दिखा. 

एजेंसी का कहना है कि कुछ भागों में लगातार मूसलाधार वर्षा के चलते एक समय मॉनसून वर्षा 106 प्रतिशत पर पहुंच गई. हालांकि यह स्थिति ज्‍यादा लंबी नहीं रही और इन आंकड़ों ने भी कहीं न कहीं मॉनसून पूर्वानुमान एजेंसियों को मौसम पूर्वानुमान संशोधित करने के लिए प्रेरित किया.

जतिन सिंह कहते हैं, 'स्‍काईमेट ने स्थिति पर पैनी नज़र बनाए रखी और उत्‍साह में आकर आंकड़ों में कोई फेरबदल नहीं किया. हमारी एजेंसी ने मौसम में ब्रेक की संभावना को ध्‍यान में रखते हुए बताया कि सामान्‍य से ऊपर चल रहे वर्षा के आंकड़ें जल्‍द नीचे आएंगे और यह काफी हद तक सही रहा'.

उल्‍लेखनीय है कि पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अनुसार, इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून 'सामान्य से कम' था और इस वजह से देश के कुछ हिस्सों में कृषि क्षेत्र पर इसका असर पड़ सकता है. मंत्रालय के मुताबिक, 'मानसून दीर्घावधि (एलपीए) के औसत का 95 फीसदी था, जो सामान्य से कम है'. एलपीए के 96-104 फीसदी तक बारिश को 'सामान्य' बारिश माना जाता है. शुरू में मॉनसून की भविष्यवाणी करते हुए भारतीय मौसम विभाग ने इसे एलपीए का 96 फीसदी करार दिया था, हालांकि बाद में इसे संशोधित कर जून में 98 फीसदी कर दिया गया. भारत में बारिश का मौसम एक जून से शुरू होता है और 30 सितंबर तक चलता है.