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एक साथ 100 लड़कियों ने छोड़ा स्कूल, कहा- 'अब यहां नहीं पढ़ सकते', जानिए वजह

17 जुलाई को सरकार के आदिवासी विकास मंत्रालय और शिक्षा विभाग को बच्चियों नें मिलकर एक पत्र लिखा था. जिसमे उन्होनें कहां था की 20 जुलाई तक अगर महिला वॉर्डन और अन्य कर्मचारीयों की नियुक्ति नहीं होती तो वह होस्टल छोड देंगे. 

एक साथ 100 लड़कियों ने छोड़ा स्कूल, कहा- 'अब यहां नहीं पढ़ सकते', जानिए वजह
गढ़चिरोली के सिरोंचा में अनुसूचित जनजातियों की बच्चियों के लिए नवबौध्द सरकारी आश्रम स्कूल शुरु किया गया है.

गढ़चिरोली: महाराष्ट्र के गढ़चिरोली आश्रम स्कूल में रहने वाली 100 से जादा बच्चियों ने स्कूल छोड दिया है. बच्चियों का कहना है की इस स्कूल में महिला वॉर्डन नहीं है. कोई महिला कर्मचारी भी यहां न होने से वह असुरक्षित महसूस कर रही है, जिसके कारण उन्होंने स्कूल छोड़ने का फैसला लिया है. स्कूली बच्चियों का कहना है उन्होंने इस बारे में लगातार शिक्षा और अन्य संबंधित विभागों को सूचित किया है, लेकिन कोई भी इस मामले पर एक्शन लेने का तैयार नहीं है, इसलिए उनके पास अंत में स्कूल छोड़ने का ही एक मात्र विकल्प बचा है.

6 साल पहले आदिवासी बच्चियों के लिए खोला गया था स्कूल
बता दें कि गढ़चिरोली के सिरोंचा में अनुसूचित जनजातियों की बच्चियों के लिए नवबौध्द सरकारी आश्रम स्कूल शुरु किया गया है. जिले के अलग-अलग जगह से आकर आदिवासी बच्चियां यहां पर रहती है. छह साल पहले यह स्कूल शुरू किया गया था. तब से लेकर अब तक यहां पर कोई भी महिला वॉर्डन की नियुक्ती नहीं हुई है. साथ ही साथ कोई भी अन्य महिला कर्मचारियों की नियुक्ती भी नहीं की गई है, जिसके कारण बच्चियों को काफी परेशानी हो रही है.  

साल में दो बार होता है स्कूल का सर्वेक्षण
बच्चियों का कहना है की उन्होंने इस बारे में कई बार प्रशासनिक अधिकारियों को सूचित किया है, लेकिन कोई भी एक्शन लेने को तैयार नहीं है. एक बच्ची ने बताया कि साल में दो बार आश्रम स्कूल का सर्वेक्षण होता है. स्कूल में सर्वेक्षण के दौरान आने वाली टीम से कई बार महिला वॉर्डन और महिला कर्मचारी ना होने की बात बताई है, लेकिन अब तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है. 

17 जुलाई को मंत्रालय को लिखा गया था पत्र
17 जुलाई को सरकार के आदिवासी विकास मंत्रालय और शिक्षा विभाग को बच्चियों नें मिलकर एक पत्र लिखा था. जिसमे उन्होनें कहां था की 20 जुलाई तक अगर महिला वॉर्डन और अन्य कर्मचारीयों की नियुक्ति नहीं होती तो वह होस्टल छोड देंगे. सरकार से कोई जवाब नहीं आया तो बच्चियों ने अपने माता-पिताओ को बुला लिया. बच्चियों के परिजनों का कहना है कि उम्र के इस पड़ाव पर अपनी शारीरिक और मानसिक स्थिति बताने के लिए महिला वॉर्डन का होना जरूरी है. अब जब मंत्रालय की ओर से भी बच्चियों की चिट्ठी का जवाब नहीं आया है तो हम उन्हें वापस घर ले जा रहे हैं.