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राजस्थान: शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के बाद भी 3500 पद खाली, बेरोजगारों को दूसरी सूची का इंतजार

रोजगार की आस देख रहे बेरोजगारों को प्रशासन और अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा दर-दर की ठोकरें खाकर भुगतना पड़ रहा है.

राजस्थान: शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के बाद भी 3500 पद खाली, बेरोजगारों को दूसरी सूची का इंतजार
भर्ती पूरी नहीं होने के कारण बेरोजगारों में खासा आक्रोश है.

जयपुर: वर्ष 2018 में 28 हजार पदों पर निकाली गई रीट शिक्षक भर्ती लेवल-2 में भर्ती प्रक्रिया के बाद करीब 3500 पद खाली रह गए. वहीं, 6 महीने का समय बीत जाने के बाद भी प्रदेश के सैंकड़ों बेरोजगारों को दूसरी सूची का इंतजार है. रोजगार की आस देख रहे बेरोजगारों को प्रशासन और अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा दर-दर की ठोकरें खाकर भुगतना पड़ रहा है.

बता दें कि, पिछली कांग्रेस सरकार की ओर से रीट शिक्षक भर्ती लेवल-2 में 28 हजार पदों पर भर्ती निकाली गई थी. जिसकी परीक्षा फरवरी 2018 में सम्पन्न हुई तो वहीं सितम्बर में परिणाम जारी करने के बाद जल्द भर्ती प्रक्रिया पूरी की गई. भर्ती को लेकर अंतिम प्रक्रिया अप्रैल में सम्पन्न हुई थी. जिसके बाद विभिन्न विषयों के करीब 35 सौ से ज्यादा पद खाली रह गए थे.

वहीं, भर्ती प्रक्रिया की दूसरी सूची में किसी भी प्रकार का कोई पेंच नहीं फंसा हुआ है और ना ही भर्ती कोर्ट में अटकी हुई है. ऐसे में भर्ती पूरी नहीं होने के चलते बेरोजगारों में खासा आक्रोश है. राजस्थान बेरोजगार एकीकृत महासंघ अध्यक्ष उपेन यादव का कहना है कि 'सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही और अधिकारियों की अनदेखी के चलते दूसरी सूची जारी नहीं की जा रही है. हालांकि मुख्यमंत्री ने सकारात्मक आश्वासन दिया है, लेकिन शिक्षा मंत्री तो अब बेरोजगारों से मिलने से भी इनकार कर रहे हैं. ऐसे में अगर जल्द ही बेरोजगारों की सुनवाई नहीं हुई तो बेरोजगार फिर से सड़कों पर उतरेंगे'.

रीट शिक्षक भर्ती लेवल-2 में अपनी नियुक्ति का इंतजार कर रहे बेरोजगार दर-दर भटक रहे हैं. पहले 35 दिनों तक बीकानेर निदेशालय के सामने धरना दिया, लेकिन मंत्री बीडी कल्ला के बाद इन बेरोजगारों ने अपना धरना समाप्त किया. इस बात को भी गुजरे 3 महीने का समय हो चुका है. बेरोजगार कुलदीप शर्मा का कहना है कि संस्कृत, हिंदी, अंग्रेजी, सामाजिक, गणित के 35 सौ से ज्यादा पद खाली है. ऐसे में शिक्षक तो प्रभावित हो ही रहा है. साथ ही बेरोजगार भी परेशान हो रहे हैं. अगर सरकार ने जल्द नहीं सुनी तो बेरोजगार जल्द ही सड़कों पर उतरेंगे'.

रोजगार की आस लगाए बैठे बेरोजगार अब हताश होते हुए नजर आ रहे हैं. आर्थिक तंगी के हालात से तो सामना करना ही पड़ रहा है, लेकिन अब ये बेरोजगार मानसिक रूप से भी परेशान होने लगे हैं. लेवल-2 में वेटिंग लिस्ट में शामिल अरविंद सिंह राठौड़ का कहना है कि 'कांग्रेस ने सत्ता में आने से पहले बेरोजगारों के साथ का वादा किया था, लेकिन अब सरकार अपना वादा पूरा नहीं कर रही है. रोजगार की मांग को लेकर दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं. अगर 1 अक्टूबर तक समस्या समाधान नहीं हुआ तो फिर बेरोजगार सड़कों पर उतरेंगे'.

बहरहाल, प्रदेश में करीब 1 दर्जन से ज्यादा भर्तियां किसी ने किसी पेंच में फंसी हुई हैं, लेकिन जो भर्तियां किसी पेंच में नहीं फंसी है, वो प्रशासनिक लापरवाही का शिकायत हो रही है. जिसको लेकर बाद अब बेरोजगारों में आक्रोश व्याप्त होता जा रहा है. साथ ही उन्होने अब 1 अक्टूबर से सड़कों पर उतरने की चेतावनी दे डाली है.