close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

मुंबई में मौत के 600 आशियाने जिन्हें बीएमसी ने भेज रखा है नोटिस

बीएमसी ने जिन इमारतों को नोटिस भेजा है उनमें से 400 से ज्यादा जर्जर इमारतें प्राइवेट हैं.

मुंबई में मौत के 600 आशियाने जिन्हें बीएमसी ने भेज रखा है नोटिस
मुंबई के डोंगरी इलाके में मंगलवार को गिरी बिल्डिंग 2-3 दिन पहले कुछ ऐसी स्थिति में थी, मंगलवार को यह बिल्डिंग गिर गई.

मुंबईः मायानगरी मुंबई के डोंगरी इलाके में मंगलवार को एक 4 मंजिला इमारत के गिरने से बड़ा हादसा हो गया. यह इमारत डोंगरी के टंडेल रोड पर स्थित थी. इस हादसे में 40-50 लोगों के दबे होने की आशंका है. इस इमारत में 8 से ज्यादा परिवार रहते थे. गृह निर्माण मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील के मुताबिक हादसे में अब तक 12 लोगों की मौत हो चुकी है. म्हाडा की इमारत पुननिर्माण के लिए डेवलपर को दी गयी थी - वहीं MHADA के अध्यक्ष उदय सामंत ने जानकारी दी है कि इस बिल्डिंग में 15 परिवार रहते थे. 

आपको बता दें कि मुंबई में ऐसी कई बिल्डिंग है जिन्हें बीएमसी की तरफ से नोटिस भेजा गया है. जानकारी के मुताबिक शहर में मौत के 600 आशियाने हैं. इन्हें बीएमसी से नोटिस भेजा गया है. फिर भी हजारों लोग इन इमारतों में जान जोखिम में डालकर रह रहे हैं. बारिश के मौसम में उनके सिर पर कच्चे धागे से बंधी तलवार लटकी रहती है. मुंबई के डोगरी इलाके की ऐसी ही एक इमारत मंगलवार को ढह गई. आज जो इमारत गिरी है वो म्हाड़ा (MHADA) की बताई जा रही हैं.

बीएमसी ने जिन इमारतों को नोटिस भेजा है उनमें से 400 से ज्यादा जर्जर इमारतें प्राइवेट हैं. बीएमसी की 80 से ज्यादा इमारतें खतरनाक घोषित की जा चुकी है वहीं म्हाडा और राज्य सरकार की 40 से ज्यादा इमारतें भी खतरनाक सूची मे ंहै. सबसे ज्यादा खतरनाक इमारतें मुंबई के कुर्ला इलाके में बताई जा रही है.

दरअसल मुंबई में इमारतों के रिडेवलपमेंट का प्रोसेस इतना धीमा और जटिल हैं कि लोग जल्दी घर खाली करने को तैयार नहीं होते. नोटिस मिलने के बावजूद वो अपना घर नहीं छोड़ते क्योंकि उन्हें डर रहता है कि पता नहीं उन्हें अपना आशियाना वापस भी मिल पाएगा या नहीं और अगर मिलेगा भी तो कितने बरसों के बाद. दरअसल मुंबई में कई परिवार बरसों से ट्रांजिट कैम्प में अपने घरों का इंतजार करते गुजार चुके हैं लेकिन अब तक उन्हें अपना घर नहीं मिला है. यही वजह है कि लोग जान जोखिम में डालकर इस तरह की जर्जर इमारतों में रहते है. लोगों की और प्रशासन की नींद तब टूटती है जब कोई हादसा हो जाता है.