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कहीं सूख ना जाए अनाज का कटोरा, अलार्मिंग सिचुएशन से गुजर रही है पंजाब की मिट्टी

कृषि विभाग (Agriculture Department) ने इस कमी को दूर करने के लिए किसानों को जागरूक करने की कवायद शुरू कर दी है. पोषक तत्वों की कमी खेत में फसल के अवशेष को आग लगाने, किसान (farmer) की अज्ञानता और रासायनिक खाद (fertilizer) और कीटनाशकों का अधिक प्रयोग करना है.

कहीं सूख ना जाए अनाज का कटोरा, अलार्मिंग सिचुएशन से गुजर रही है पंजाब की मिट्टी
(प्रतीकात्मक तस्वीर)

चंडीगढ़: कृषि के मामले में पंजाब (Punjab) को देश के अन्न का भंडार कहा जाता है. लेकिन यदि ध्यान ना दिया गया तो देश के अन्न के भंडार का दामन बंजर हो सकता है. धरती की उपजाऊ शक्ति को बनाए रखने वाले जरूरी तत्व पंजाब (Punjab) की धरती से लगातार कम हो रहे हैं. कृषि विभाग (Agriculture Department) ने प्रदेश भर से करीब 22 लाख खेतों से मिट्टी लेकर निरीक्षण किया तो जरूरी तत्वों की कमी की बात सामने आई. हालांकि कृषि विभाग (Agriculture Department) ने इस कमी को दूर करने के लिए किसानों को जागरूक करने की कवायद शुरू कर दी है. पोषक तत्वों की कमी खेत में फसल के अवशेष को आग लगाने, किसान (farmer) की अज्ञानता और रासायनिक खाद (fertilizer) और कीटनाशकों का अधिक प्रयोग करना है.

पंजाब (Punjab) के खेतों की मिट्टी को सोना उगलने वाली कहा जाता है और देश के अन्न भंडार के केंद्रीय पूल में पंजाब (Punjab) 25 फीसदी गेंहू और 40 फीसदी धान का योगदान देता है. लेकिन पंजाब (Punjab) की सोना उगलने वाली मिट्टी की गुणवत्ता में पिछले कुछ समय से दुखद बदलाव आ रहा है. रासायनिक खाद (fertilizer), कीटनाशक पदार्थों के अंधाधुंध इस्तेमाल और खेतों में फसलों के अवशेष को आग लगाने जैसे कई कारणों से पंजाब (Punjab) के खेतों की जमीन में जमीन की उपजाऊ शक्ति कायम रखने वाले जरूरी तत्वों में भारी कमी आई है. कृषि विभाग (Agriculture Department) ने प्रदेश भर से करीब 22 लाख खेतों से मिट्टी के सैंपल लेकर निरीक्षण किया तो यह बात सामने आई है.

पंजाब (Punjab) कृषि विभाग (Agriculture Department) के सचिव काहन सिंह पन्नू ने बताया कि सबसे चिंतनीय स्थिति आर्गेनिक कार्बन को लेकर है. निरीक्षण में यह सामने आया है कि यदि फसल के लिए मिट्टी में एक प्रतिशत आर्गेनिक कार्बन की जरूरत है तो वो घट कर आधे प्रतिशत से भी कम हो गई है. कृषि क्षेत्र के जानकार मानते हैं कि आर्गेनिक कार्बन की कमी हो तो किसानों द्वारा फसल में पाई जाने वाली अन्य खाद (fertilizer) भी फसल को नहीं लगती. इसी तरह पोटाश, आयरन, जिंक और सल्फर जैसे आठ जरूरी तत्व कम हो रहे हैं. इसी तरह पोटाश जो कि फसल की अच्छी पैदावार और चमक के लिए जरूरी होता है जो बाजार में फसल की कीमत को भी प्रभावित करता है. यानि कुल मिलाकर इसे एक अलार्मिंग सिचुएशन कहा जा सकता है.

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काहन सिंह पन्नू के अनुसार किसानों द्वारा रासायन खादों (fertilizer) का अत्याधिक इस्तेमाल, कीटनाशक पदार्थों का प्रयोग और फसल के अवशेष को खेत में ही आग लगाना, इन जरूरी तत्वों कमी होने के बड़े कारण माने जा रहे हैं. फिलहाल इस चिंता को समझते हुए कृषि विभाग (Agriculture Department) ने खेतों की मिट्टी से लिए गए सैंपल की रिपोर्ट के हिसाब से 22 लाख soil health card बनाए हैं जो किसानों को दिए जाएंगे. इन soil health cards के लिहाज से किसानों को यह जानकारी मिलेगी कि उसके खेत में किस पोषक तत्व की कमी है और इसकी कमी को पूरा करने के लिए उनको क्या क्या करना चाहिए.

बहराहाल भारत के कुल उत्पादन में पंजाब (Punjab) करीब 11 प्रतिशत चावल करीब 20 प्रतिशत गेहूं और करीब 13 प्रतिशत कपास का योगदान करता है. 1970 की हरित क्रान्ति में पंजाब (Punjab) ने भारत के अन्न भंडार भर दिए थे. पूरे देश की भूख मिटाने के लिए पंजाब (Punjab) की कृषि भूमि का इतना दोहन हुआ जिसकी कीमत आज पंजाब (Punjab) के किसान अपने जीवन से दे रहे हैं. भारत के कुल भू-भाग का 1.5 प्रतिशत पंजाब (Punjab) है. फिलहाल गिरते भू-जल स्तर के बाद पंजाब (Punjab) की कृषि के लिए यह दूसरी बड़ी चिंता है.