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इलाहाबाद यूनिवर्सिटी कैंपस और हॉस्टल अपराधियों के पनाहगाह बन गए हैः हाई कोर्ट

पीठ ने हाल ही में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पीसीबी छात्रावास में हुई एक युवक की नृशंस हत्या पर स्वतः संज्ञान में लेते हुए यह टिप्पणी की.

इलाहाबाद यूनिवर्सिटी कैंपस और हॉस्टल अपराधियों के पनाहगाह बन गए हैः हाई कोर्ट
(फाइल फोटो)

प्रयागराज: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कभी ‘पूरब का ऑक्सफोर्ड’ कहलाने वाले इलाहाबाद विश्वविद्यालय के बारे में गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा है कि इस विश्वविद्यालय का परिसर और छात्रावास, अपराधियों के लिए पनाहगाह बन गए हैं.

मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति एस.एस. शमशेरी की पीठ ने हाल ही में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पीसीबी छात्रावास में हुई एक युवक की नृशंस हत्या पर स्वतः संज्ञान में लेते हुए यह टिप्पणी की.

अदालत ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, प्रयागराज के मंडलायुक्त, जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के साथ ही इलाहाबाद विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार को नोटिस भी जारी किए.

इस मामले में आदेश के लिए 22 अप्रैल, 2019 की तिथि तय करते हुए अदालत ने प्रयागराज के जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और इलाहाबाद विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार को उस दिन अदालत में उपस्थित रहने का निर्देश दिया.

क्या कहा अदालत ने?
अदालत ने कहा, 'एक लोकतांत्रिक समाज में कानून का राज होता है और किसी भी तरह से इसे नुकसान पहुंचे, यह स्वीकार नहीं किया जा सकता. किसी को भी उस क्षेत्र और वहां के बाशिंदों की शांति और सौहार्द को मामूली चोट पहुंचाने की भी अनुमति नहीं दी जा सकती है.' 

अदालत ने कहा, 'यह हमारे संज्ञान में आया है कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय के नियंत्रण वाले विभिन्न छात्रावासों में बड़ी संख्या में अपराधी रह रहे हैं जो विश्वविद्यालय के नियमित विद्यार्थी नहीं हैं.' 

विश्वविद्यालय के परिसर को अपराधियों से मुक्त कराने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं, इस बारे में विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार को एक हलफनामा दाखिल कर बताने का निर्देश दिया गया है. अदालत ने प्रयागराज के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को इस मामले में उठाए गए कदमों के संबंध में स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया.