महाराष्ट्र की राजनीति का विश्लेषण: जब पवार की खिचड़ी में गिरता है घी

अगर शरद पवार चाहे और कांग्रेस को मंजूर हो तो उसे अजीत पवार को ढाई साल के लिए CM बनाने पर कोई ऐतराज नहीं है. मगर पहले ढाई साल CM , शिवसेना का होगा. 

महाराष्ट्र की राजनीति का विश्लेषण: जब पवार की खिचड़ी में गिरता है घी
फाइल फोटो

मुंबई: शिवसेना नेताओ की बंद कमरे में शरद पवार (Sharad Pawar) से मुलाक़ात हुई. शिवसेना ने अपनी चिंता तो जताई और साथ ही बीजेपी को सत्ता से बाहर रखने के लिए कुर्बानी देने का भी ऑफर दिया. शिवसेना ने​ अपने तरफ से कहा है की वह अपनी पांच साल का मुख्यमंत्री पद की मांग छोड़ने को तैयार है. अगर शरद पवार चाहे और कांग्रेस को मंजूर हो तो उसे अजीत पवार को ढाई साल के लिए सीएम बनाने पर कोई ऐतराज नहीं है. मगर पहले ढाई साल सीएम शिवसेना का होगा. क्या इसके जरिये शरद पवार - अजित पवार एक तीर से कई शिकार कर रहे हैं.

ढाई साल के लिए खुद के परिवार का सीएम
गठबंधन के बीच की बातचीत के बीच अगर सीधे सीधे ये मांग करते तो कांग्रेस - शिवसेना की तरफ से नानुकुर और देरी होती, साथ ही एनसीपी में अजित पवार के प्रतिद्वंदी भी शांत हो गए. अब ये सब साथ साथ इतने आगे निकल आये हैं की इस मुद्दे पर गठबंधन तोड़ना शिवसेना - कांग्रेस के लिए जगहंसाई के मौक़ा होता. हाथ मिलाकर शिवसेना - कांग्रेस ने अपने वोट बैंक का नुक्सान वैसे ही कर लिया है अब सत्ता से भी दूर रहना एक बेवकूफी होती. 

राष्ट्रपति शासन को तुरंत हटवाना
अगर शिवसेना एनसीपी कांग्रेस गठबंधन मिलकर दावा पेश करता तब भी पहला काम होता की राष्ट्रपति शासन हटाना. राष्ट्रपति शासन हटाना अपने आप में एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमे बीजेपी की 'खुशकिस्मती ' से प्रक्रिया के नामपर राज्यपाल और केंद्र सरकार हफ्तों या दो महीने तक का वक्त तक खींच सकते थे. इस लम्बे वक्त में बीजेपी बहुत सारे विधायकों को अपनी तरफ कर सकती थी. नामुमकिन को मुमकिन बनानेवाले हालिया राजनीतिक इतिहास को देखते हुए ये कोई असंभव कृत्य नहीं था.

बीजेपी की सरकार बन रही थी और एक्सप्रेस गति से काम हुआ. यानी राष्ट्रपति शासन हटाने का रोड़ा अपने आप निकल गया.

अजीत पवार पर भ्रष्टाचार आरोप 
बीजेपी शिवसेना की सरकार ने अजित पावर के खिलाफ  भ्रष्टाचार के कई सारे आरोप लगाए थे, उनके खिलाफ कई मामले भी दर्ज हुए. मगर बीजेपी के अजीत पवार के साथ हाथ मिलाने और डिप्टी सीएम बनाने के बाद, अब आगे बीजेपी ने अजीत पवार को भ्रष्टाचारी बताकर हमला करने का नैतिक अधिकार लगभग खो दिया. एहि हाल शिवसेना के साथ होगा जो कभी अजीत पवार को भ्रष्टाचारी बताती थी , उसके लिए अब अजीत पवार स्वीकार योग्य हो गए.

अजित पवार एनसीपी में अनचैलेंज नेता
एनसीपी के अंदर भी अजीत पवार को कई सारे अन्य नेता जैसे छगन भुजबल, जयंत पाटिल, दिलीप वलसे पाटिल जैसे नेताओ से कड़ी चुनौती मिल रही थी. अजीत पवार का कद बढ़ता और पार्टी में प्रभाव. शरद पवार की इच्छा की केंद्र में बेटी सुप्रिया और राज्य में भतीजा अजीत के जरिये सब प्रभुत्व पवार परिवार में ही रहता ​.