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दशहरे के दिन इस गांव में होता है 'खून खेल', भगवान की मूर्ति के लिए लोग एक-दूसरे पर भांजते हैं लाठियां

 गांव की परंपरा और मान्यता के मुताबिक यहां के भगवान माला मल्लेश्वर स्वामी की कृपा उन्हीं लोगों पर बरसती है जो भगवान की मूर्ति पाने में सफल होते हैं

दशहरे के दिन इस गांव में होता है 'खून खेल', भगवान की मूर्ति के लिए लोग एक-दूसरे पर भांजते हैं लाठियां

कुरनूल : आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले में विजयादशमी (Vijaya Dashami) के दिन परंपरा के नाम पर खूनी खेल देखने को मिलता है. यहां के देवरगट्टू गांव में हर साल दशहरे का उत्सव खून में रंगा दिखाई पड़ता है. यहां गांव के लोग दो गुटों में बंटकर भगवान की मूर्ति के लिए एक दूसरे पर जमकर लाठियां बरसाते हैं. 

दरअसल गांव की परंपरा और मान्यता के मुताबिक यहां के भगवान माला मल्लेश्वर स्वामी की कृपा उन्हीं लोगों पर बरसती है जो भगवान की मूर्ति पाने में सफल होते हैं. हर साल की तरह इस बार भी दशहरे की रात सैंकड़ों की संख्या में गांववाले इकट्ठा हए और दो गुटों में बंट गए. 

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इसके बाद दोनों तरफ से एक दूसरे पर जमकर लाठियां भांजी गई. दर्जनों लोग घायल हुए. जिनमें से कई को गंभीर चोट लगी. 

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स्थानीय प्रशासन और सरकार की तरफ से भी कई बार गांववालों को इस प्रकार के आयोजन को नहीं करने और इस खतरनाक खेल को नहीं खेलने की अपील की गई है. लेकिन आस्था के नाम पर होने वाली अंधभक्ति में डूबे लोग फिर भी इससे सबक नहीं लेते है. लोग इसे ईश्वरीय अनुष्ठान बताते हैं और हर साल इसका आयोजन करते हैं.