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सेना ने आयोजित किया क्रिकेट टूर्नामेंट, कश्मीरी युवा बोले- हम शुक्रगुजार हैं

सेना के एक अधिकारी ने कहा, "सेना का पूरी कश्मीर घाटी में यह प्रयास है कि जो युवा पढ़े-लिखे हैं और बेरोज़गार हैं, उनको खेलकूद में इन्वॉल्व रखा जाए जब तक उन्हें काम नहीं मिलता." 

सेना ने आयोजित किया क्रिकेट टूर्नामेंट, कश्मीरी युवा बोले- हम शुक्रगुजार हैं
प्रतियोगिता में शामिल युवाओं ने कहा कि यह एक बेहतरीन प्लेटफॉर्म है युवाओं के लिए. इस तनाव भरे माहौल में ऐसे क़दमों से युवा गलत रास्तों को नहीं चुनते हैं.

कश्मीर: उत्तरी कश्मीर के तंगमर्ग इलाके में पिछले कुछ दिनों से खूब चहलपहल रही. इस इलाके के एक मैदान चल रहे क्रिकेट टूर्नामेंट को देखने के लिए हर दिन इलाके की खासी भी़ड़ रहती थी. दरअसल, इलाके में तैनात सेना के 336 फील्ड रेजीमेंट ज़ेरॉन की ओर से आयोजित इस टूर्नामेंट में जेकेपी और तंगमर्ग के दूरदराज़ इलाकों की 16 पुरुष और 4 महिला क्रिकेट टीमों ने हिस्सा लिया. प्रतियोगिता का फाइनल मैच सोमवार को हुआ जो जेकेपी और हाजिबल टीमों के बीच खेला गया. 

प्रतियोगिता में शामिल युवाओं ने कहा कि यह एक बेहतरीन प्लेटफॉर्म है युवाओं के लिए. इस तनाव भरे माहौल में ऐसे क़दमों से युवा गलत रास्तों को नहीं चुनते हैं. विजयी रही जेकेपी टीम के खिलाड़ी मुश्ताक़ अहमद ने कहा कि यह टूर्नामेंट सेना ने आयोजित किया था. यह बहुत ही अच्छा प्लेटफॉर्म है. प्रतियोगिता में शामिल हुए युवा इसे अच्छा कदम मानते हैं. उनका कहना है कि ऐसे कार्यक्रम युवाओं को गलत रास्तों से बचते हैं. यह खिलाड़ी कहते है कि युवा काफी गलत कामों में डूबा है, जो सेहत और समाज के लिए बहुत घातक है. 

युवा खिलाडी रियाज़ अहमद ने कहा, "हम सेना के बेहद शुक्रगुज़ार हैं जिन्होंने यह प्रतियोगिता आयोजित की. हम चाहते है कि प्रशासन भी इस इलाके की तरफ ध्यान दे और इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा दे." लड़कों और लड़कियों दोनों के लिए इस क्रिकेट टूर्नामेंट का आयोजन सेना द्वारा तंगमर्ग में किया गया था, जो इस क्षेत्र में अपनी तरह का पहला था टूर्नामेंट था. इस आयोजन का उद्देश्य युवाओं को हुनर दिखाने के लिए एक समान मंच प्रदान करना था. सेना खेलों के माध्यम से सकारात्मक युवा विकास को बढ़ावा देना का प्रयास करती रहती है. 

सेना के एक अधिकारी ने कहा, "सेना का पूरी कश्मीर घाटी में यह प्रयास है कि जो युवा पढ़े-लिखे हैं और बेरोज़गार हैं, उनको खेलकूद में इन्वॉल्व रखा जाए जब तक उन्हें काम नहीं मिलता." अधिकारी ने कहा, "हो सकता है, वो हुनरमंद हों और ऐसा प्लेटफॉर्म मिलने पर वो अपना लोहा मनवा सके." गौरतलब है कि सेना कश्मीर घाटी में दशकों से आतंकवाद के खिलाफ लड़ रही है. साथ ही घाटी के लोगों की तरक्की और खुशहाली में भी अपना योगदान देना ज़रूरी समझती है.