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गुजरात में कुछ ऐसी है कांग्रेस की हालात, पिछले 4 साल में कई विधायकों ने छोड़ा पार्टी का साथ

जिला पंचायत के अलावा पिछले तीन से चार साल में कांग्रेस ने अपनी लगभग 42 तालुका पंचायत घुमा दी है और आतंरिक गुटबाजी और कलह की वजह से कांग्रेस की यह हालत सामने आई है.

गुजरात में कुछ ऐसी है कांग्रेस की हालात, पिछले 4 साल में कई विधायकों ने छोड़ा पार्टी का साथ
गुजरात में सबसे बड़ा नुकसान हुआ है. फाइल फोटो

गुजरात: आतंरिक विवादों और गुटबाजी की वजह से गुजरात में कांग्रेस की हालत पिछले चाल साल में काफी खराब हो गई है. पिछले चार सालों में कांग्रेस को कई जिला पंचायत और नगरपालिकाओं में सत्ता खोनी पड़ी है. वहीं कई विधायक भी पार्टी छोड़ चुके हैं. साल 2015 में स्थानीय चुनावों में कांग्रेस का परचम लहराया था. 31 जिला पंचायत और 230 तालुका पंचायत के चुनाव में कांग्रेस ने ज्यादातर जिला और तालुका पंचायत अपने कब्जे में की थी. 31 जिला पंचायत में से 27 पर कांग्रेस ने कब्जा किया था, लेकिन अगर पिछले चार साल से अब तक की बात की जाये तो कांग्रेस ने 10 जिलापंचायत को अपने हाथों से गवां दिया है, जिसमें अहमदाबाद, भावनगर, छोटाउदेपुर, दाहोद, खेड़ा, महिसागर, पाटण, डांग, द्वारका शामिल हैं. 

अब हालात ये हैं कि कांग्रेस राजकोट, वड़ोदरा और साबरकांठा जिला पंचायत भी कांग्रेस के हाथ से निकलने की कगार पर हैं, क्योंकि यहां परिस्थितियां पूरी तरह से पार्टी के खिलाफ नजर आ रही हैं. कांग्रेस प्रमुख के खिलाफ कांग्रेस के सदस्य अविश्वास प्रस्ताव ला चुके हैं, पर अपनी आंतरिक परिस्थिति को ठीक करने के बजाय कांग्रेस इसका ठीकरा बीजेपी पर फोड़ती नजर आ रही है. 

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जिला पंचायत के अलावा पिछले तीन से चार साल में कांग्रेस ने अपनी लगभग 42 तालुका पंचायत गवां दी हैंं और आतंरिक गुटबाजी और कलह की वजह से कांग्रेस की यह हालत सामने आई है. अगर तालुका पंचायतों की बात की जाये तो कांग्रेस के लिए गुजरात में सबसे बड़ा नुकसान हुआ है. इस नुकसान के लिए कांग्रेस कह रही है कि सत्तापक्ष डरा-धमका कर हमारे सदस्यों को तोड़ रही है. 

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साल 2015-16 में 83 नगरपालिकाओं के चुनाव में कांग्रेस ने 29 नगरपालिकाओं पर अपनी सत्ता हासिल की थी, लेकिन कांग्रेस ने 16 नगरपालिकाएं गवां दीं. वहीं विधानसभा सीटों की बात करें तो  चुनाव के बाद अबतक कांग्रेस सात विधायक गवां चुकी है. अब 6 विधानसभा सीटों के लिए उपचुनाव होने जा रहे हैं जहां भी कांग्रेस पूरी तरह कमजोर नजर आ रही है. आर्टिकल 370 हटने के बाद तो प्रदेश कांग्रेस ने जैसे हथियार ही डाल दिए हैं. विपक्ष न तो किसी स्थानीय मुद्दे को ठीक से उठा पा रही है, न ही लोगों को भरोसा दिला पा रही है.