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आसाराम को राजस्थान हाईकोर्ट से लगा झटका, याचिका फिर खारिज

सुनवाई के दौरान आसाराम के वकील ने जेजे एक्ट 2015 के हवाला देते हुए इसमें सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट के जजमेंट का भी हवाला दिया, लेकिन आसाराम के वकील की एक भी दलील काम नहीं आई.

आसाराम को राजस्थान हाईकोर्ट से लगा झटका, याचिका फिर खारिज
आसाराम की ओर से दूसरी बार यह प्रार्थना पत्र पेश किया गया था.

भवानी भाटी/जोधपुर: राजस्थान हाईकोर्ट मुख्य पीठ जोधपुर से नाबालिग से यौन उत्पीडन के मामले में अजीवन कारावास की सजा काट रहे आसाराम की दूसरी सजा स्थगन याचिका पर भी राहत नहीं मिल पाई. राजस्थान हाई कोर्ट ने आसाराम की दूसरी सजा स्थगन याचिका को नोट प्रेस यानि खारिज कर दिया. ऐसे में आसाराम के जेल से बाहर आने की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा. बता दें कि नाबालिग छात्रा के यौन उत्पीडऩ मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे आसाराम की ओर से दूसरी बार यह प्रार्थना पत्र पेश किया गया था.
 
राजस्थान हाईकोर्ट मुख्य पीठ जोधपुर में न्यायाधीश संदीप मेहता व न्यायाधीश विनित कुमार माथुर की विशेष खण्डपीठ में सजा स्थगन प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के दौरान आसाराम के अधिवक्ता श्रीयास गुप्ता ने प्रार्थना पत्र पर बहस प्रारंभ की. शुरुआती दलीलों से कोर्ट के सहमत नहीं होने पर गुप्ता ने बहस जारी रखने की बजाय उसके विचारार्थ बल नहीं (नोट प्रेस) देने की बात कही. जिस पर खंडपीठ ने प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया. 

वहीं, गुप्ता ने अपील पर जल्दी सुनवाई का आग्रह किया, जिस पर कोर्ट ने उनकी मांग मंज़ूर कर ली. अब जनवरी के दूसरे सप्ताह से अपील पर सुनवाई होगी. सुनवाई के दौरान आसाराम के वकील ने नाबालिग की आयु संबन्धित मामले पर बहस शुरू की. साथ ही जेजे एक्ट 2015 के हवाला देते हुए इसमें सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट के जजमेंट का भी हवाला दिया, लेकिन आसाराम के वकील की एक भी दलील काम नहीं आई.

यह है पूरा मामला
आसाराम पर उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर की एक नाबालिग से बलात्कार करने का आरोप था, जिसमें वो दोषी साबित हुए. यह लड़की मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में आसाराम के आश्रम में पढ़ाई कर रही थी. पीड़िता का आरोप है कि आसाराम ने जोधपुर के निकट मनई आश्रम में उसे बुलाया था और 15 अगस्त 2013 को उसके साथ दुष्कर्म किया था. आसाराम से इन आरोपों से इंकार किया था.

वहीं, आसाराम को एससी एसटी कोर्ट के तत्कालीन पीठासीन अधिकारी मधुसूदन शर्मा की कोर्ट ने 25 अप्रैल 2018 को यौन उत्पीड़न के आरोप में दोषी मानते हुए आसाराम को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. तब से आसाराम जोधपुर सेंट्रल जेल में कैदी नंबर 130 के रूप में सजा काट रहा है. आसाराम लगभग पांच साल ग्यारह महीने से जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद है. जोधपुर पुलिस ने आसाराम को इंदौर आश्रम से 31 अगस्त 2013 को गिरफ्तार कर 1 सितम्बर 2013 को जोधपुर लाई थी.