पुष्कर पशु मेले में दिखा ऊंटों के लिए लगाव, विदेशी पर्यटकों ने भी लिया हिस्सा

दरअसल नागौर ज़िले के बिलाड़ा निवासी नेथा रायका का संपर्क सोशल मीडया के जरिए सैम से हुआ. सैम का ऊंटों के प्रति लगाव को देख कर नेथा ने सैम को पुष्कर मेले में आने का निमंत्रण दे दिया.

पुष्कर पशु मेले में दिखा ऊंटों के लिए लगाव, विदेशी पर्यटकों ने भी लिया हिस्सा
इस दौरान नेथा अपने साथ 8 ऊंट वंश भी पुष्कर मेले में बिक्री के लिए लेकर आया.

मनवीर सिंह, अजमेर: अंतराष्ट्रीय पुष्कर पशु मेले में शनिवार को एक अनोखा नज़ारा देखने को मिला. जहां ऊटों के प्रति लगाव, बेजुबानों से प्रेम, उठ संरक्षण की लगन, इन्ही कारणों के चलते सात समुन्दर पार ऑस्ट्रेलिया के सैम नामक पर्यटक को विश्व के सबसे बड़े ऊठ मेले में पुष्कर खींच लाया. 

दरअसल नागौर ज़िले के बिलाड़ा निवासी नेथा रायका का संपर्क सोशल मीडया के जरिए सैम से हुआ. सैम का ऊंटों के प्रति लगाव को देख कर नेथा ने सैम को पुष्कर मेले में आने का निमंत्रण दे दिया. जिस पर सैम नागौर जिले के बिलाड़ा ग्राम आया और 20 किलोमीटर का पैदल सफर तय कर पुष्कर पहुंचा. 

इस दौरान नेथा अपने साथ 8 ऊंट वंश भी पुष्कर मेले में बिक्री के लिए लेकर आया. सैम ने बताया कि वो अपने देश ऑस्ट्रेलिया में 5 वर्षों से ऊंटों के साथ काम कर रहा है और इसी कारण उसे इन बेजुबानों से प्रेम है और जब उसे भारत आने का अवसर प्राप्त हुआ तो वो ना नहीं कर पाया.

सैम ने इसे एक ना भूलने वाला अनुभव बताया. सैम ने कहा कि मैं आशा करता हूं कि यहां इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा. वहीं सैम के मेजबान नेथा रायका ने उठ संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि ऊंट अमूल्य संपति है और राजस्थान में इसे बचाना चाहिए. सैम और नेथा के पुष्कर पहुंचने पर ऊंट संरक्षण से जुड़े अशोक टाक ने फूल मालाओं से स्वागत किया. गौरतलब है कि पुष्कर में देश का सबसे बड़ा ऊंट मेला लगता है. पशुपालन विभाग के आकड़ो पर गौर किया जाए तो अब तक 1200 से अधिक उठ वंश आ चुके है और 4 नवम्बर तक इनकी संख्या 3 हजार के पार तक जा सकती है.