close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

बारां: जान हथेली पर लेकर स्कूल जाने को मजबूर हुए बच्चे, प्रशासन बेखबर

बारां के अटरू क्षेत्र के झारखंड़ गांव में आने-जाने के लिए सड़क और पुलिया तक नहीं बनी है. ऐसे में रोज लोग नदी में बहते पानी में जान जोखिम में डालकर आना-जाना पड़ता है.

बारां: जान हथेली पर लेकर स्कूल जाने को मजबूर हुए बच्चे, प्रशासन बेखबर
बच्चे अपनी जान के खतरे मे डालकर स्कूल जाने को मजबूर हैं.

राम मेहता/बारां: राजस्थान के बारां के अटरू क्षेत्र के झारखंड़ गांव में स्कूल जाने के लिए बच्चों को रोज संघर्ष करना पड़ता है. बच्चे अपनी जान के खतरे मे डालकर स्कूल जाने को मजबूर हैं. हालांकि प्रशासन को भले ही इल नौनिहालों की चिंता न हो लेकिन इनके अभिभावक मजबूरी में अपने छोटे बच्चों के कंधे पर बैठाकर नदी पार करवाते हैं ताकि उनके बच्चे स्कूल जा सकें. 

बता दें कि बारां जिले में आज भी आजादी के 70 बर्ष बाद भी लोगों को मलभूत सुविधाऐं नहीं मिल पा रही हैं.  गांव जाने के लिए सड़क और पुलिया तक नहीं बनी है. ऐसे में रोज लोग नदी में बहते पानी में जान जोखिम में डालकर आना-जाना पड़ता है. बच्चों को भी रोज पढ़ाई के लिए संघर्ष करना पड़ता है. 

वहीं अटरू उपखंड मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर खानपुर मार्ग पर स्थित झाड़खंड़ गांव के छोटे-छोटे बच्चों को भी बारिश के दिन ऐसी ही परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. आम लोगों को भी बारिश के दिनों में परेशानी झेलनी पड़ रही है.

ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के दिनों में एक ओर बालूखाल ओर दूसरी ओर भूपसी नदी से गांव घिर जाता है. हमने कई बार इसको लेकर प्रशासन से लेकर अपेन क्षेत्रिय नेताओं से बात-चीत करने की कोशिश की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई.  

साथ ही गां के लोगों का यह भी कहना है कि रेवेन्यू विलेज न होने के कारण इस गांव को प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से भी नही जोड़ा गया. ऐसे में लोग नदी को पार करके ही आते-जाते है. वही, बच्चें स्कूल जानें के लिए रोज संघर्ष करते है. ग्राम पंचातय से लेकर मुख्यमंत्री तक सडक बनाने की मांग कर चुकें गांव की सुध नहीं ली, जिसके कारण लोग नरकीय जीवन जीने को मजबूर हैं.