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बारां: करोड़ों खर्च करने के बाद भी नहीं बदले स्टेडियम के हालात, खिलाड़ी परेशान

सरदार वल्लभभाई पटेल स्टेडियम में हर साल राज्य स्तरीय प्रतियोगिताएं होने के बावजूद नगर पालिका इसकी हालत को सुधारने के लिए कोई कदम नहीं उठा रही है. 

बारां: करोड़ों खर्च करने के बाद भी नहीं बदले स्टेडियम के हालात, खिलाड़ी परेशान
स्टेडियम में पानी भरा रहने के कारण इसमें खिलाड़ी नहीं खेल पाते हैं.

राम मेहता/बारां: राजस्थान के अंता में जिला मुख्यालय का स्टेडियम अपनी बदहाली पर आंसू बहाने को मजबूर है. वैसे तो सरकार द्वारा स्टेडियम के नाम लाखें करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी खिलाड़ी प्रतिभाओं को स्टेडियम का लाभ नहीं मिल रहा है.

बारां के जिले के अंता में नगरपालिका का करोड़ों का लागत का खुद का स्टेडियम होने के बावजूद यहां चल रही जिला स्तरीय प्रतियोगिता में खिलाड़ियों को दूसरों के खेल मैदान और खुली जगह पर निर्भर होना पड़ रहा है. यहां बने स्टेडियम में बरसाती पानी भरा रहने के कारण जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे बने हुए हैं. वहीं, घास उग जाने के कारण यह स्टेडियम दुर्दशा का शिकार बना हुआ है. ऐसे में यहां पर खेला जाना संभव नहीं होने के कारण खिलाड़ियों को अन्य जगह पर खिलाया जा रहा है.

इस सरदार वल्लभभाई पटेल स्टेडियम में हर साल राज्य स्तरीय प्रतियोगिताएं होने के बावजूद नगर पालिका प्रशासन द्वारा कोई ध्यान नहीं देने के कारण स्टेडियम दुर्दशा का शिकार बना हुआ है. इस स्टेडियम में पानी का निकास नहीं होने के कारण बारिश के दिनों में यह तालाब का रूप ले लेता है. वहीं, कई दिनों तक इस स्टेडियम में पानी भरा रहने के कारण इसमें खिलाड़ी नहीं खेल पाते हैं.

इस मामले को लेकर खिलाड़ियों का कहना है नगर पालिका प्रशासन को स्टेडियम के पानी की निकासी को लेकर कई बार अवगत कराया जा चुका है. इसके बावजूद इस समस्या का आज तक कोई समाधान नहीं किया गया है. वहीं, प्रतिभाओं में स्टेडियम के अभाव में निखार नहीं आ रहा है. यहां तक कि खिलाड़ी प्रेक्टिस तक नहीं कर पा रहें हैं. वहीं सरकार की अनदेखी के कारण प्रतिभाशाली खिलाडियों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है.

इधर, बारां जिला मुख्यालय पर आयोजित 64 वी राज्य स्तरीय सॉफ्टबॉल प्रतियोगिता में एक दिन में करीब 15-15 मैच खेले जा रहें है. दो-दो खेल मैदानों पर आयोजित इस प्रतियोगिता में खिलाड़ियों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है. खिलाड़िओं को कीचड़ से भरे खेल के मैदान में अपनी प्रैक्टिस करना पड़ रही है. देखने वाली बात यह है कि कब प्रशासन ने करोडों खर्च कर बनायें गए इस स्टेडियम की सुध लेते है ताकि खिलाड़ियों को इसका लाभ मिल सके.