बिहार चुनाव: मांझी और चौधरी के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बनी इमामगंज सीट, ये हैं आंकड़ें

  बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly election) में गया जिले की नक्सल प्रभावित इमामगंज सीट पर लड़ाई काफी दिलचस्प हो गई है.

बिहार चुनाव: मांझी और चौधरी के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बनी इमामगंज सीट, ये हैं आंकड़ें
फाइल फोटो

गया (बिहार):  बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly election) में गया जिले की नक्सल प्रभावित इमामगंज सीट पर लड़ाई काफी दिलचस्प हो गई है. इस सीट पर दो बड़े दिग्गजों पूर्व विधानसभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी (Uday Narayan Chaudhary) और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी (Jeetan Ram Manjhi) के बीच प्रतिष्ठा बचाने का संघर्ष चल रहा है. 

LJP से पूर्व विधायक के पोते की बहू मैदान में
बीजेपी के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने जहां हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (HAM) के प्रमुख जीतन राम मांझी मांझी को उम्मीदवार बनाया है. वहीं महागठबंधन ने राजद के कद्दावर महादलित नेता व पूर्व विधानसभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी को उम्मीदवार बनाया है. उधर लोकजनशक्ति पार्टी (LJP) ने पूर्व विधायक रामस्वरूप पासवान के पोते की बहू शोभा देवी को चुनाव मैदान में उतारा है. जिससे मुकाबला दिलचस्प हो गया है.

पिछले चुनाव में मांझी ने उदय नारायण चौधरी को हराया था
पिछले चुनाव में जीतन राम मांझी ने उदय नारायण चौधरी को 29 हजार से अधिक मतों से पराजित कर उनके विजयरथ को रोक दिया था. उदय नारायण चौधरी इस बार के चुनाव में मांझी से पुराना हिसाब बराबर करना चाहते हैं. जानकारों के मुताबिक जनता के साथ चौधरी के करीबी रिश्ते मांझी के मुकाबले उनके सामाजिक समीकरण को मजबूत बना रहे हैं. 

पांच बार विधायक रह चुके हैं उदय नारायण चौधरी
पिछले चुनाव में चौधरी को भले ही हार का सामना करना पड़ा हो लेकिन वे इमामगंज सीट से पांच बार चुनाव जीतकर विधायक बन चुके हैं. वर्ष 1990 में जनता दल, वर्ष 2000 में समता पार्टी और फरवरी 2005, अक्टूबर-नवंबर 2005 और 2010 में जदयू के टिकट पर चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे.

इमामगंज सीट पर ढाई लाख मतदाता करेंगे फैसला
करीब 2.50 लाख मतदाताओं की संख्या वाली इमामगंज सीट पर महादलितों के वोट सबसे ज्यादा हैं. इसके बाद अतिपिछड़ा व पिछड़ी जातियों के वोट हैं. अगड़ी जातियों का वोट यहां काफी कम है.

बदल गई है राजनीति की दशा
बांके बाजार में रहने वाले युवा संतोष कुमार कहते हैं कि राजनीति की दिशा अब बदल गई है. सड़क, पेयजल की बात करने वाली पार्टियों को रोजगार की भी बात करनी होगी. गया के एक स्कूल के सेवानिवृत्त शिक्षक उदयभान सिंह कहते हैं कि सिंचाई की व्यवस्था नहीं होने के कारण यहां हजारों एकड़ भूमि बेकार पड़ी रहती है. प्राइमरी से इंटर तक के सरकारी स्कूलों की दशा खराब है. सड़क, रास्ते और पीने के पानी की भी समस्या है. 

मांझी के लिए LJP कैंडिडेट बनी मुसीबत
गया के वरिष्ठ पत्रकार अब्दुल कादिर कहते हैं कि मांझी के लिए सभी बड़ी समस्या लोजपा प्रत्याशी बनी हुई है. उन्होंने कहा कि लोजपा प्रत्याशाी शोभा देवी के चुनावी मैदान में उतर जाने से मुकाबला रोचक हो गया है. मांझी का दांगी व कुशवाहा जैसी जातियों के साथ अच्छे संबंध रहे हैं और मांझी मतदाताओं की संख्या भी 50 हजार से अधिक है, जो उनके पक्ष में है.

त्रिकोणीय संघर्ष हुआ तो मांझी को नुकसान
वे स्पष्ट कहते हैं, इस चुनाव में इमामगंज की सीट पर चौधरी और मांझी में सीधी टक्कर है. लेकिन लोजपा प्रत्याशी इसे त्रिकोणात्मक बनाने में जुटी हैं. अगर संघर्ष त्रिकोणात्मक हुआ तो मांझी को नुकसान उठाना पड़ सकता है. इमामागंज में पहले चरण के तहत 28 अक्टूबर को मतदान होना है. बिहार में 243 सीटों के लिए तीन चरणों में मतदान होना है.

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