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बीकानेर: श्राद्ध शुरू होते ही पित्रों को तर्पण दे रहे लोग, तालाब के किनारे कर रहे पूजा

पितृपक्ष के दौरान पितृ अपने परिजनों के आस-पास रहते हैं इसलिए इन दिनों कोई भी ऐसा काम नहीं करना चाहिए, जिससे पितृगण नाराज हों.

बीकानेर: श्राद्ध शुरू होते ही पित्रों को तर्पण दे रहे लोग, तालाब के किनारे कर रहे पूजा
इन 15 दिनों में पितृगण पृथ्वी पर आते हैं और अपने परिजनों के पास रहते हैं.

त्रिभुवन रंगा, बीकानेर: श्राद्ध पक्ष शुरू होने के साथ बीकानेर शहर के पवित्र तालाबों पर श्रद्धा की भीड़ देखी जा रही है. जहां पितृपक्ष श्राद्ध के तर्पण सहित विविध अनुष्ठान किए जा रहे हैं और दिवंगत हुए लोगों की आत्म को शान्ति मिलने के लिए उनके परिवार के सदस्य और पुत्र तालाब में पानी में उतर कर तर्पण करते हैं. 

बीकानेर के धरणीधर तालाब में बड़ी संख्या में शनिवार को श्राद्ध पक्ष के दूसरे दिन दिवगत आत्मा की शान्ति के लिए सूरज को पानी से अर्ध्य देकर लोगों ने तर्पण किया. यह तर्पण का कार्यक्रम कर्मकांडी और संस्कृत विद्वानों द्वारा करवाया गया. अलसुबह पानी के कुंड में स्नान करके, उगते सूर्य को अर्धयाय देकर तर्पण किया. पंडित नवरत्न व्यास ने बताया कि शास्त्रों की मान्यता है कि श्राद्धपक्ष में पितृगण 15 दिनों के लिए में पृथ्वी पर आते हैं. 

पितृपक्ष के दौरान पितृ अपने परिजनों के आस-पास रहते हैं इसलिए इन दिनों कोई भी ऐसा काम नहीं करना चाहिए, जिससे पितृगण नाराज हों. पितरों को खुश रखने, घर परिवार में सुख, शांति और समृद्धि प्रदान करने के लिए नियमित तर्पण करना चाहिए. 

यह कार्यक्रम श्राद्ध पक्ष के 15 दिन तक ऐसे ही बीकानेर के अलग अलग तालाबो पर श्राद्ध का तर्पण किया जाएगा. जहां स्थानीय लोगों ने एक कतार में तालाब के भीतर जाकर अपने परिजनों को याद किया वही विधि विधान और पंडितो के जरिए तर्पण को किया. ऐसा माना जाता है कि इन 15 दिनों में पितृगण पृथ्वी पर आते हैं और अपने परिजनों के पास रहते हैं.