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राजस्थान उपचुनाव में BJP और RLP में हो सकता है गठबंधन, इस बात पर बनी सहमति

हनुमान बेनीवाल के नागौर सांसद बनने के बाद खींवसर सीट खाली हुई थी. इस नाते भी आरएलपी इस सीट पर अपना दावा मजबूत मान रही थी. 

राजस्थान उपचुनाव में BJP और RLP में हो सकता है गठबंधन, इस बात पर बनी सहमति
हनुमान बेनीवाल के नागौर सांसद बनने के बाद खींवसर सीट खाली हुई थी.

जयपुर: लोकसभा चुनाव के बाद अब विधानसभा की दो सीटों पर होने वाले उप चुनाव में भी बीजेपी और आरएलपी का गठबंधन तय हो गया है. इस गठबंधन के तहत खींवसर विधायनभा सीट आरएलपी के लिए छोड़ना तय हो गया है. दोनों पार्टियों के नेताओं के बीच इस बात पर सहमति बन गई है.

जयपुर में गठबंधन के लिए चर्चा को लेकर देर रात तक आरएलपी और बीजेपी नेताओं के बीच बैठकों का दौर चला. इसके बाद राजस्थान बीजेपी के नेताओं ने पूरा ब्यौरा दिल्ली में पार्टी के केन्द्रीय नेतृत्व को भेज दिया है. इस समझौते के तहत मण्डावा में बीजेपी अपने चुनाव चिन्ह पर प्रत्याशी उतारेगी और आरएलपी मण्डावा में बीजेपी की मदद भी करेगी. 

राजस्थान में विधानसभा की दो सीटों पर उपचुनाव के लिए 21 अक्टूबर को वोटिंग होनी है. मतदान से पहले कांग्रेस और बीजेपी के साथ ही आरएलपी के भी जीत के अपने-अपने दावे हैं. हालांकि, कांग्रेस दोनों सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारेगी, लेकिन खींवसर सीट के लिए बीजेपी और हनुमान बेनीवाल की आरएलपी में गठबंधन तय हो गया है. गठबंधन की औपचारिक घोषणा भी जल्द ही जहो जाएगी, लेकिन सूत्रों का कहना है कि खींवसर सीट आरएलपी के लिए छोड़ने पर बीजेपी के नेताओं में सहमति बन गई है. 

हनुमान बेनीवाल के नागौर सांसद बनने के बाद खींवसर सीट खाली हुई थी. इस नाते भी आरएलपी इस सीट पर अपना दावा मजबूत मान रही थी. हनुमान बेनीवाल कहते हैं कि खींवसर से आरएलपी विधानसभा में जीती थी और मण्डावा से बीजेपी का प्रत्याशी जीता था. बेनीवाल कहते हैं कि इसलिए वो दोनों सीटों पर इन दोनों ही पार्टियों का स्वाभाविक दावा मानते हैं. बेनीवाल ने कहा कि मण्डावा में आरएलपी का कार्यकर्ता बीजेपी प्रत्याशी को वोट दिलाने के लिए पूरी मदद करेगा. साथ ही उन्होंने कहा कि वे खुद भी मण्डावा में बीजेपी प्रत्याशी के लिए चुनावी सभाएं करेंगे.

बेनीवाल ने गठबंधन के बहाने साधा वसुंधरा राजे पर निशाना - 
विधानसभा उप-चुनाव में बीजेपी के साथ गठबंधन को लेकर पहले से आश्वस्त दिख रहे हनुमान बेनीवाल पहले से ही वसुंधरा राजे पर भी निशाना साध रहे थे. हालांकि इस बार गठबंधन तय करने या नहीं करने के लिए वसुंधरा राजे को कोई औपचारिक ज़िम्मेदारी नहीं दी है लेकिन बेनीवाल पहले से ही कह रहे थे कि अगर प्रदेश में आरएलपी और बीजेपी का गठबंधन नहीं हुआ तो वे भी वसुमंधरा राजे का असर मान जाएंगे. उन्होंने कहा कि लेकिन अगर गठबंधन हो जाता है तो यह भी साबित हो जाएगा कि राजस्थान बीजेपी में अब वसुंधरा राजे का कोई बड़ा असर नहीं है. 

कौन होगा आरएलपी का प्रत्याशी ?
बीजेपी और आरएलपी में गठबंधन का औपचारिक ऐलान जल्द होगा. उधर आरएलपी संयोजक हनुमान बेनीवाल कहते हैं कि उन्होंने अभी आरएलपी का प्रत्याशी तय नहीं किया है. बेनीवाल कहते हैं कि खींवसर आरएलपी की राजधानी है और पार्टी का प्रत्याशी राजधानी के लोग ही तय करेंगे. यह प्रत्याशी बेनीवाल के परिवार से होगा या पार्टी कार्यकर्ताओं में से इस सवाल पर नागौर सांसद कहते हैं कि जनता के बीच हमेशा रहने वाला व्यक्ति प्रत्याशी होगा. उन्होंने अपने प्रत्याशी की खूबियां गिनाते हुए कहा कि ऐसा व्यक्ति जो कभी अपना मोबाइल फोन बन्द नहीं रखे और हमेशा जनता के बीच रहे वही आरएलपी का प्रत्याशी हो सकता है.