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उदयपुर: बीजेपी और कांग्रेस ने कसी कमर, जानिए कौन मारेगा बाजी ?

बीजेपी और कांग्रेस, दोनों राजनैतिक पार्टियों ने भी अपनी तैयारियों को तेज कर दिया है. 

उदयपुर: बीजेपी और कांग्रेस ने कसी कमर, जानिए कौन मारेगा बाजी ?
चुनावी वादों और दावों के बीच जनता भी सियासी नब्ज टटोलने को तैयार है.

अविनाश जगनावत, उदयपुर: राजस्थान में नगर निकाय चुनाव को लेकर लेक सिटी उदयपुर की फिजा भी चुनावी रंगों में रंग चुकी है. बीजेपी और कांग्रेस, दोनों राजनैतिक पार्टियों ने भी अपनी तैयारियों को तेज कर दिया है. नेताओं ने अपना जनसंपर्क भी तेज कर दिया है. चुनावी वादों और दावों के बीच जनता भी सियासी नब्ज टटोलने को तैयार है. 

उदयपुर नगर निकाय चुनाव का इतिहास देखें तो कांग्रेस के लिए राह उतनी आसान नहीं नजर आ रही रही है. अब तक हुए पांच निकाय चुनावों का इतिहास देखें तो बीजेपी अपना दबदबा बनाए हुए है. पिछले पांच चुनावों में उदयपुर के नगर परिषद ने नगर निगम बनने तक का लंबा सफर तय किया. इस दौरान पांच चुनाव हुए जिसमें अगर कुछ नहीं बदला तो वह था निगम बनने वाला बार्ड. पिछले 25 साल से बीजेपी ने ही नगर परिषद हो या नगर निगम हर चुनाव में जीत दर्ज करते हुए अपना बोर्ड बनाने में सफलता हासिल की. 

तीन वार्डों तक सिमट गई कांग्रेस
इस दौरान विपक्षी पार्टी कांग्रेस का प्रदर्शन चुनाव दर चुनाव गिरता ही गया. शहर की सरकार के लिए हुए चुनाव में कांग्रेस ने अपने चुनावी सफर की शुरूआत 13 वार्डो में जीत के साथ की, जो अब गिरकर महज तीन वार्डों तक सिमट गई. वहीं बीजेपी ने पहले चुनाव में 36 वार्डों पर जीत दर्ज कर शुरूआत की थी, पांचवें चुनाव में बीजेपी का ये आंकड़ा 49 वार्डों की जीत तक पहुंच गया. इन पांचों ही चुनाव में कभी भी विपक्षी पार्टी कांग्रेस शहर में सरकार बनाने के करीब भी नहीं पहुंच पाई. कांग्रेस गुटबाजी से ही उबर नहीं पाई, जिसे दूर करने के लिए पार्टी के जिम्मेदार पदाधिकारियों ने काई ठोस प्रयास नहीं किए. 

किसके सिर सजेगा जीत का सेहरा?
बीजेपी ने संगठन को और मजबूत करते हुए विपक्ष के समाने अपने आप को हर चुनाव में मजबूत करती चली गई. इस दौरान एक बार परिसीमन भी हुआ और वार्डो की संख्या 50 से बढ़ कर 55 हो गई, लेकिन इसका फायदा भी बीजेपी को ही हुआ. अब उदयपुर में एक बार फिर उदयपुर में शहर की सरकार के लिए चुनाव होने वाले है और नए परिसीमन के बाद वार्डो की संख्या भी बढ़ कर भी 70 हो गई है. ऐसे में एक बार फिर देखना दिलचस्प होगा कि इस चुनाव में इतिहास अपने आप को दोहराता है या फिर कांग्रेस पार्टी चुनावी जंग में नया इतिहास लिखने में सफल हो पाती है.

Edited By : Sujit Kumar Niranjan