चीन की सीमा पर तैयार की गई इस सड़क से बढ़ेगी भारत की ताकत

असम के डिब्रूगढ को अरुणाचल प्रदेश के पासीघाट से जोड़ने वाले देश के सबसे लंबे सड़क और रेल पुल का इस साल के उत्तरार्ध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उद्घाटन किये जाने की संभावना है.

चीन की सीमा पर तैयार की गई इस सड़क से बढ़ेगी भारत की ताकत
एशिया के इस दूसरे सबसे बड़े पुल में शीर्ष पर तीन लेन की सड़क है और उसके नीचे दोहरी रेल लाइन है..(फाइल फोटो)

बोगीबील (असम): असम के डिब्रूगढ को अरुणाचल प्रदेश के पासीघाट से जोड़ने वाले देश के सबसे लंबे सड़क और रेल पुल का इस साल के उत्तरार्ध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उद्घाटन किये जाने की संभावना है. इस पुल को चीन के साथ लगती सीमा पर रक्षा साजो सामान के लिए एक बड़ा प्रोत्साहन माना जा रहा है. बोगीबील परियोजना के मुख्य अभियंता (निर्माण) महेंद्र सिंह ने बताया कि इस साल जुलाई तक 4.94 किलोमीटर लंबे इस पुल का निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा लेकिन उसके इलेक्ट्रिकल और सिग्नल कार्य हेतु दो महीने और लगेंगे.

अधिकारियों ने बताया कि इस बोगीबेल पुल का उद्घाटन इस साल के आखिर तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किये जाने की संभावना है. एशिया के इस दूसरे सबसे बड़े पुल में शीर्ष पर तीन लेन की सड़क है और उसके नीचे दोहरी रेल लाइन है. यह पुल ब्रह्मपुत्र के जलस्तर से 32 मीटर की ऊंचाई पर है. इसे स्वीडन और डेनमार्क को जोड़ने वाले पुल की तर्ज पर बनाया गया है.

अधिकारियों के अनुसार सरकार के लिए यह पुल पूर्वोत्तर में विकास का प्रतीक तथा चीनी सीमा पर तैनात सशस्त्र बलों के लिए तेजपुर से आपूर्ति प्राप्त करने के लिए साजोसामान संबंधी मुद्दे को हल करने की दिशा में एक रणनीतिक कदम है. सिंह ने कहा, ‘‘ट्रेन से डिब्रूगढ़ से अरुणाचल प्रदेश जाने के लिए व्यक्ति को गुवाहाटी होकर जाना होता है और उसे 500 किलोमीटर से अधिक दूरी तय करनी होती है.

इस पुल से यह यात्रा 100 किलोमीटर से कम रह जाएगी.’’ इस पुल के लिए 1996 में ही मंजूरी मिल गयी थी लेकिन निर्माण कार्य 2002 में भाजपा नीत पहली राजग सरकार ने शुरु किया था. कांग्रेस नीत संप्रग सरकार ने 2007 में इसे राष्ट्रीय परियोजना घोषित कर दिया था.  

चीन की सीमा पर सुरंगों के जरिए सड़कों का जाल बिछाएगा भारत
भारत अपनी सीमाओं पर सुरक्षा को मजबूत करने के मकसद से सीमा पर सड़कों का जाल बिछा रहा है. खासकर चीन की सीमा से सटे इलाकों में भारत सुरंगों के जरिए सड़क बनाने पर जोर दे रहा है ताकि मौसम की परवाह किए बिना सीमा पर सुरक्षा को और मजबूती प्रदान की जा सके. रक्षा मंत्रालय से मिली जानकारी के मुताबिक, सीमा पर सड़क बनाने की जिम्मेदारी बीआरओ यानी सीमा सड़क संगठन को सौंपी गई है.

बीआरओ ने हिमाचल प्रदेश के रोहतांग दर्रे और सिक्किम में थेंग का सर्वेक्षण करना भी शुरू कर दिया है. हिमाचल और सिक्कम के अलावा उत्तराखंड और अरुणाचल प्रदेश में भी सड़कों के लिए सर्वे का काम चल रहा है. मंत्रालय के सूत्र बताते हैं कि चीन भारत की सीमा से सटे इलाकों में पहले ही सड़कें बना चुका है. इतना ही नहीं कई जगहों पर तो चीन ने भारत की सीमा में घुसपैठ करके सड़कें बनाने की कोशिश भी कोशिश की, लेकिन भारत के विरोध के कारण उसे पीछे हटाना पड़ा.

इनपुट भाषा से भी