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दिसंबर 2023 तक भारत में भी दौड़ने लगेगी बुलेट ट्रेन, तेजी से चल रहा परियोजना का काम

नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (National High Speed Rail Corporation Limited) के प्रबंध निदेशक अचल खरे ने इस बात की आशा व्यक्त की है कि दिसंबर 2023 तक अहमदाबाद (Ahmedabad) और मुंबई (Mumbai) के बीच बुलेट ट्रेन (Bullet train) शुरू की जाएगी.

दिसंबर 2023 तक भारत में भी दौड़ने लगेगी बुलेट ट्रेन, तेजी से चल रहा परियोजना का काम
(प्रतीकात्मक फोटो)

अहमदाबाद: नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (National High Speed Rail Corporation Limited) के प्रबंध निदेशक अचल खरे ने इस बात की आशा व्यक्त की है कि दिसंबर 2023 तक अहमदाबाद (Ahmedabad) और मुंबई (Mumbai) के बीच बुलेट ट्रेन (Bullet train) शुरू की जाएगी. उन्होंने कहा कि परियोजना (project) की अनुमानित राशि (Estimated Amount) 17000 करोड़ रुपये है. 80 प्रतिशत भूमि का अधिग्रहण (Acquisition) का कार्य नवंबर तक संपन्न हो जाएग.

नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (National High Speed Rail Corporation Limited) के प्रबंध निदेशक अचल खरे ने कहा कि परियोजना (project) को 27 चरणों में वितरित किया गया है. जिसमें सिविल कार्य (civil work) के लिए टेंडर (tender) जारी किया गया है और नवंबर तक उसे खोलने की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी. यात्री जंक्शन अहमदाबाद (Ahmedabad) के कालूपुर रेलवे स्टेशन पर 10, 11 और 12 रेलवे प्लेटफार्म के ऊपर तैयार होगा. इस परियोजना में 21 किमी लंबी सुरंग समुद्र में तैयार होगी, इस सुरंग (tunnel) का डायामीटर 13.2 मीटर रहेगा. उसके एक साथ दो ट्रैक होंगे. पीक ऑवर्स में हर आधे घंटे में एक ट्रेन चलेगी. यह क्षमता 6 मिनट में एक ट्रेन तक बढ़ाई जाएगी.

बताया जा रहा है कि बुलेट ट्रेन (Bullet train) परियोजना के लिए सबसे कठिन सवाल भूमि अधिग्रहण का था. परियोजना के लिए आवश्यक कुल 1380 हेक्टेयर भूमि में से 622 हेक्टेयर भूमि पहले ही अधिग्रहित की जा चुकी है. बुलेट ट्रेन परियोजना से भूमि अधिग्रहण के लिए गुजरात के कुल 158 गांवों की थोड़ी-थोड़ी जमीन की आवश्यकता थी. जिसमें से केवल 15 गांव के किसानों ने भूमि अधिग्रहण का विरोध किया था. जिसमें दक्षिणी गुजरात (Gujarat) में इस परियोजना का कड़ा विरोध किया गया था. ऐसे मामले में गांव में 53 फीसदी अधिक जंत्री और चार गुना कीमतों पर जमीन संपादन का काम किया गया है. अचल खरे ने कहा कि 2600 किसानों और निजी मालिकों के समझौते से अब तक 307 हेक्टर भूमि को अधिग्रहण किया गया है.

उन्होंने यह भी दावा किया कि ये सभी भूमि अधिग्रहण दोनों पक्षों की सहमति से किए गए थे. उन्होंने कहा कि कुल 55 अदालती मामले हुए हैं. जिनमें से कुछ को वापस ले लिया गया है और कुछ अंतिम चरण में हैं. महाराष्ट्र (Maharashtra) के 97 गांवों में से 80 गांव में संयुक्त प्रबंधन सर्वेक्षण पूरा हो चुका है और अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी है. इस परियोजना में कुल 360 हेक्टेयर निजी भूमि के अधिग्रहण के लिए 1700 करोड़ का भुगतान किया गया है. यह परियोजना सीधे तौर पर अच्छा रोजगार पैदा करेगी.

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बुलेट ट्रेन (Bullet train) पूरी तरह से चालू होने से पहले जहां से गुजरती है वहां 25,000 से अधिक लोगों को रोजगार (Employment) देगी और संचालन एवं रखरखाव के चरण में 3,000 लोगों को रोजगार देगी. अप्रत्यक्ष रूप से इस परियोजना के माध्यम से चार से पांच गुना अधिक रोजगार पैदा होगा. इस परियोजना के लिए 70 हजार से अधिक पेड़ों का खात्मा किए जाने की संभावना थी. लेकिन नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने 50 प्रतिशत से ज्यादा पेड़ों को एक जगह से दूसरी जगह ट्रांसप्लांट किया है. जब ट्रेन शुरू होगी तो अहमदाबाद साबरमती से शिवाजी टर्मिनल मुंबई तक का टिकट का दर 3000 रुपये का होगा. जिसकी बाद में एयर फेयर (Air Fare) और रेलवे फेयर (Railway fare) के साथ कंपेयर करके समीक्षा की जाएगी.